17 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

केडीए से बदलेगी लाडपुरा, केशवराय पाटन व तालेड़ा के गांवों की तस्वीर

केडीए के तोहफे पर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल से विशेष बातचीत

2 min read
Google source verification
UDH Minister Shanti Dhariwal

मंत्री धारीवाल का ऐलान: ऐसा प्लान कर रहा हूं डिजाइन कि सड़कों पर कभी नहीं आएगा नदियों का पानी, कोटा को मिलेगा विशेष पैकेज

जग्गोसिंह धाकड़/ कोटा. राज्य का तीसरा बड़ा शहर कोटा विकास के नए आयाम छू रहा है। कोटा शहर में करोड़ों के विकास कार्यों की नदी बह रही है। सड़क यातायात को सुगम बनाने के लिए अंडरपास, ओवरपास और फ्लाईओवर से जुड़े कार्यों के अलावा प्रदेश के अनूठे रिवरफ्रंट और ऑक्सीजोन जैसे प्रोजेक्ट अन्तिम चरण में हैं। सुनियोजित व संतुलित विकास की दिशा में हाल ही सरकार ने कोटा को विकास प्राधिकरण को तोहफा दिया है। राजस्थान पत्रिका के अभियान के जरिए कोटा की आवाज बुलंद होने पर हाल ही राज्य सरकार ने बजट सत्र में कोटा को विकास प्राधिकरण (कोविप्रा-केडीए) की सौगात दी है। केडीए घोषणा के साथ ही नगरीय विकास विभाग ने कोटा में विकास प्राधिकरण के गठन की तैयारी शुरू कर दी है। प्राधिकरण किस तरह से काम करेगा और आधारभूत ढांचे में क्या बदलाव होगा। इस मुद्दे पर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल से राजस्थान पत्रिका ने विशेष बातचीत की। यूडीएच मंत्री धारीवाल ने कहा कि विकास प्राधिकरण बनने के बाद कोटा का मास्टर प्लान नए सिरे से बनाया जाएगा। इसके अलावा कोटा जिले की लाडपुरा पंचायत समिति, बूंदी जिले की तालेड़ा पंचायत समिति और केशवरायपाटन पंचायत समिति के गांवों को शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। गांवों का विकास भी शहर जैसा होगा। मंत्री धारीवाल से बातचीत के कुछ अंश यहां प्रस्तुत है।

सवाल: केडीए बनने की घोषणा के बाद अब क्या प्रक्रिया चल रही है, किस तरह से केडीए आगे बढ़ेगा।
जवाब: अब परिसीमन तय करने के लिए सर्वे किया जाएगा। जिसके बाद केडीए की अधिसूचना जारी होगी और नए पदों का सृजन होगा। इंजीनियरिंग, प्रशासनिक, लेखा और अन्य अनुभागों से जुड़े कई पद सृजित होंगे।
सवाल: कोटा विकास प्राधिकरण का एरिया कहां तक होगा?
जवाब: केडीए का क्षेत्र कहां तक होगा, यह सर्वे के बाद ही तय होगा, लेकिन हमारा यह प्रयास है कि लाडपुरा पंचायत समिति के सभी गांव केडीए के कार्य क्षेत्र में शामिल हो जाएं। इसके अलावा बूंदी जिले की तालेड़ा पंचायत समिति और केशवरायपाटन पंचायत समिति के गांवों का विकास भी कोटा विकास प्राधिकरण के माध्यम से किया जाए। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसी बात को ध्यान में रखकर कोटा में केडीए बनाने की घोषणा की है।

सवाल: लाडपुरा पंचायत समिति के सभी गांव शामिल होने के बाद ग्राम पंचायतों के अस्तित्व पर क्या कोई प्रभाव पड़ेगा।

जवाब: नहीं, ग्राम पंचायतों के अस्तित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। क्योंकि ग्राम पंचायत अपनी आबादी क्षेत्र के अलावा 500 मीटर तक ही अबादी विस्तार का अधिकार रखती हैं। उसके बाद विकास प्राधिकरण विकास कार्य करा सकता है। चाहे नगरपालिका हो या ग्राम पंचायत उनका अस्तित्व स्वतंत्र रहेगा। केडीए केवल विकास कार्य कराएगा।

सवाल: कोटा के मौजूदा मास्टर प्लान पर किस तरह का असर पड़ेगा।

जवाब: केडीए का गठन होने पर मास्टर प्लान भी दोबारा बनाया जाएगा। क्योंकि उसमें नए गांव शामिल होंगे। इसलिए मास्टर प्लान में बदलाव की आवश्यकता होगी।

सवाल: जेडीए और एडीए की तरह ही केडीए का एक्ट होगा या फिर कुछ बदलाव होगा।

जवाब:जेडीए और एडीए के एक्ट जैसी बहुत सारी बातें होगी, लेकिन कुछ बदलाव भी किया जाएगा। यह कह सकते हैं कि 80 प्रतिशत एक्ट जेडीए व एडीए जैसा ही होगा और उसमें 20 प्रतिशत बदलाव दिखेगा।

सवाल: कितने समय में कोटा विकास प्राधिकरण काम करने लगेगा।

जवाब: 8 से 9 माह का समय लग सकता है और पूरा 1 साल भी लग सकता है क्योंकि सर्वे करने और उसकी तैयारी में काफी समय लगेगा।