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एक प्रोजेक्ट बदल देगा सात राज्यों के यात्रियों के सफर का अनुभव

दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग करीब 1483 किलोमीटर लंबा है जो 7 राज्यों से गुजरता है। इनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं। ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाए जाने के बाद नई दिल्ली-मुंबई के बीच लगने वाले यात्रा समय में 3.5 घंटे की कमी आएगी।

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जग्गोसिंह धाकड़
कोटा. भारतमाला परियोजना के तहत दिल्ली से मुम्बई तक बनाए जा रहे 8 लेन एक्सप्रेस-वे निर्माण के समानान्तर रेलवे के मिशन रफ्तार प्रोजेक्ट ने भी गति पकड़ ली है। रेलवे ने मिशन रफ्तार के तहत दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर टे्रनों की रफ्तार 160 किमी प्रति घंटे करने की योजना को दिसम्बर 2023 में पूरा करने लक्ष्य तय किया है। ऐसे में जनवरी 2024 से दिल्ली से मुंबई पहुंचने में 12 घंटे का समय लगेगा। अभी राजधानी एक्सप्रेस से दिल्ली से मुंबई पहुंचने में 15 घंटे 40 मिनट समय लगता है। कोटा से मुंबई पहुंचने में 10 घंटे 50 मिनट का समय लगता है। गति बढऩे के बाद कोटा से 8 घंटे से कम समय में मुंबई पहुंच जाएंगे।

सात राज्यों में मिलेगा लाभ
दिल्ली-मुंबई मार्ग 1,483 किलोमीटर लंबा है जो 7 राज्यों से गुजरता है। इनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं। इससे नई दिल्ली-मुंबई के बीच लगने वाले यात्रा समय में 3.5 घंटे की कमी आएगी।

निजी ट्रेनें भी रफ्तार भरेगी
प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद राजस्थान के भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बूंदी, कोटा और झालावाड़ जिले को नई आधुनिक रेल सुविधाएं मिलेगी। स्पीड बढऩे के साथ माल ढुलाई में तेजी आएगी। इस मार्ग पर वंदेमातरम श्रेणी की निजी लक्जरी ट्रेनों का भी संचालन होगा। मिशन रफ्तार पूरा होने के बाद रेलवे वायु मार्ग से सफर करने वाले यात्रियों को भी ट्रेन में सफर करने के लिए लुभाएगा।

ट्रेक की सुरक्षा ऐसे बढ़ाएंगे
रेलवे की मिशन रफ्तार परियोजना के तहत वाया कोटा होकर नागदा से मथुरा के बीच रेलवे लाइन के दोनों ओर करीब 1086 किमी दीवार का निर्माण करेगा, ताकि मवेशी या जंगली जानवर ट्रेक पर नहीं जा सके हैं।

पैसेंजर ट्रेनों की औसत गति 60 प्रतिशत बढ़ेगी
दिल्ली-मुंबई सेक्शन की गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा बढ़ाने से पैसेंजर ट्रेनों की औसत गति में भी 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होगी और मालभाड़ा यातायात की औसत गति भी दोगुनी हो जाएगी।

पूरी योजना पर 6806 करोड़ रुपए खर्च होंगे
मिशन रफ्तार के एक हिस्से के रूप में भारतीय रेलवे अपने पूरे नेटवर्क में ट्रेनों की औसत गति में सुधार लाने के लिए एक मिशन के रूप में काम कर रही है। इस परियोजना पर करीब 6806 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
कोटा मंडल में ढाई हजार करोड़ से ज्यादा खर्च होंगे।

ट्रेनों की रफ्तार 160 किमी करने के लिए कोटा मंडल में 2664.14 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें रेलपथ से जुड़े कार्य पर 1311.19 करोड़, विद्युत से जुड़े कार्य पर 874.21 करोड़, सिग्नल और टेलीकॉम से जुड़े कार्यों पर 428.26 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वहीं यांत्रिक से जुड़े कार्यों पर 50.48 करोड़ खर्च होंगे।
योजना में ये तकनीकी बदलाव शामिल-

परियोजना में ट्रेक की फेसिंग करना, स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली, मोबाइल ट्रेन रेडियो संचार और स्वचालित और यंत्रीकृत नैदानिक प्रणालियां शामिल हैं। इनसे सुरक्षा और विश्वसनीयता में काफी बढ़ोतरी होगी।

रोजगार बढ़ाने में मिलेगी मदद
यह परियोजना के निर्माण चरण के दौरान रोजगार को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है। इससे प्रत्यक्ष रूप से 3.6 करोड़ से अधिक कार्य दिवसों का सृजन होगा। इससे आर्थिक गुणक शुरू करने में मदद मिलेगी और सभी राज्यों में विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस परियोजना से मार्ग की प्रवाह क्षमता में 30-35 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।

इनका कहना है

दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर टे्रनों की रफ्तार 160 किमी प्रतिघंटे होने के बाद वायुमार्ग के यात्री भी ट्रेन में सफर करने में रुचि दिखाएंगे। इस प्रोजेक्ट के दिसम्बर 2023 तक पूरा करने के प्रयास हैं।
-पंकज शर्मा, डीआरएम, कोटा

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