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साधनों में नहीं, साध्य में है जीवन का सच्चा सुख

कोटा

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Newsdesk

Jul 29, 2026

Rajasthan

केशवरायपाटन. मुनि सुव्रतनाथ अतिशय क्षेत्र पर मंगलवार को गौरव गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण ने प्रवचन में कहा कि साधन और साध्य के महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा कि दोनों में अंतर समझना आवश्यक है। अहमदाबाद से केशवरायपाटन आने के लिए गाड़ी साधन है, लेकिन मंजिल पर उतरने के बजाय गाड़ी को ही सजाने में रम जाना ठीक नहीं। गाड़ी साधन है, प्रभु के दर्शन साध्य। उन्होंने बताया कि आंखें देखने का करण हैं और आत्मा देखने वाली है। यदि आंख से कम दिखे तो चश्मा उपकरण है। मुंह बोलने का साधन है और पांव मंदिर जाने का। मंदिर मंजिल है। आज संसार में उपकरणों का भंडार है, लेकिन करण पांच ही हैं। आर्यिका स्वस्ति भूषण ने कहा कि जब सम्यक दर्शन की प्राप्ति होती है, तो व्यक्ति जहां है वहीं सुखी हो जाता है। आज सब कुछ उपलब्ध होने पर भी लोग सुखी नहीं हैं, क्योंकि वे शरीर को ही साध्य मानकर उसे सजाने में लगे हैं। उन्होंने संदेश दिया कि शरीर का उपयोग आत्मा के कल्याण के लिए करें, जिसकी आत्मा सुखी होती है, उसका शरीर भी स्वस्थ रहता है, और दुखी आत्मा से शरीर भी अस्वस्थ होता है।