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कोटा की इन बस्तियों के हालात जस के तस, बारिश में रहना हो जाता है मुश्किल

बारिश में कोटा बैराज के गेट खोलने के बाद चंबल किनारे की बस्तियों में पानी भर जाता है। लोगों को अपने घर छोड़ सुरक्षित स्थानों पर आना पड़ता है।

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कोटा की इन बस्तियों के हालत जस के तस, बारिश में रहना हो जाता है मुश्किल

कोटा. बारिश में कोटा बैराज के गेट खोलने के बाद चंबल किनारे की बस्तियों में पानी भर जाता है। लोगों को अपने घर छोड़ सुरक्षित स्थानों पर आना पड़ता है। बाढ़ से किसी के सामान बह जाते हैं तो किसी का घर ढह जाता है। हर साल यही होता है, लेकिन प्रशासन मुनादी कराने के अलावा स्थाई हल के कोई प्रयास नहीं करता। नदी का उफान जैसे ही थमता है, लोग फिर मकानों की मरम्मत कर वहीं पर रहना शुरू कर देते हैं।


इन बस्तियों में आती है परेशानी
हनुमानगढ़ी : कुन्हाड़ी क्षेत्र में थाने के पीछे चंबल किनारे बसी इस बस्ती में नदी में उफान आते ही पानी भर जाता है। पिछली बाढ़ में तो यहां लोगों को अपने घरों का सामान समेटने का भी समय नहीं मिला। प्रशासन ने मात्र लोगों को यहां से बाहर निकाला। इसके बाद नदी में आए उफान से बस्ती के घरों में पानी भर गया, सामान भी बह गया। इस बस्ती के साथ ही वापस सकतपुरा से कुन्हाड़ी तक कई मकान चंबल नदी के किनारे बन गए हैं।


हरिजन कच्ची बस्ती : इस बस्ती में बैराज के गेट खुलते ही पानी भरना शुरू हो जाता है। ज्यादा गेट खुलने पर बस्ती में कई मकान तो पूरे डूब जाते हैं। अन्य मकानों में चार फीट तक पानी भर जाता है। लोगों को पूरा सामान समेट कर यहां से निकलना पड़ता है। बस्ती में करीब 150 घर हैं।


अनंतपुरा तालाब बस्ती : अनंतपुरा तालाब में ही भूमाफिया ने भूखण्ड बेच दिए। लोगों ने कम कीमत में प्लाट मिलने के चलते यहां घर बना लिए। हर बारिश में पठारी क्षेत्र से पानी आकर तालाब में भरता है, पूरी बस्ती जलमग्न हो जाती है। प्रशासन हर वर्ष यहां पानी भरने के बाद नावों से लोगों को बाहर निकालता है। लोग फिर आकर रहने लगते हैं।


बापूनगर कच्ची बस्ती : बैराज के 7 से 8 गेट खुलते ही बस्ती में पानी भरना शुरू हो जाता है। कई कच्चे मकान नदी में उफान में बह जाते हैं, लेकिन गेट बंद होते ही बस्ती पहले की तरह आबाद हो जाती है। इस बस्ती में 500 घर चंबल के डूब क्षेत्र में बने हुए हैं।