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कोटा होकर दौड़ने वाली ट्रेनों को भी मिलेगा सुरक्षा कवच

कवच भारतीय उद्योग के सहयोग से अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) की ओर से स्वदेशी रूप से विकसित एटीपी प्रणाली है। भारतीय रेलवे में ट्रेन संचालन में सुरक्षा के शामिल उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए दक्षिण मध्य रेलवे ने इसका गुल्लागुड़ा- चिटगिड्डा रेलवे स्टेशनों के बीच परीक्षण किया है।

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कोटा. स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच' का परीक्षण होने के बाद निकट भविष्य में वाया कोटा होकर दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर 160 किमी की रफ्तार से दौड़ने वाली ट्रेनों को भी यह सुरक्षा कवच मिलेगा। इस सेक्शन में मानवीय त्रुटियों की संभावना होने पर दुर्घटनाएं नहीं होगी। कोटा होकर दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर कवच के क्रियान्वयन को पहली प्राथमिकता में रखा है। आत्मनिर्भर भारत के एक हिस्से के रूप में 2022-23 में सुरक्षा और क्षमता वृद्धि के लिए 2 हजार किलोमीटर नेटवर्क को कवच के दायरे में लाया जाएगा।
कवच भारतीय उद्योग के सहयोग से अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) की ओर से स्वदेशी रूप से विकसित एटीपी प्रणाली है। भारतीय रेलवे में ट्रेन संचालन में सुरक्षा के शामिल उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए दक्षिण मध्य रेलवे ने इसका गुल्लागुड़ा- चिटगिड्डा रेलवे स्टेशनों के बीच परीक्षण किया है। यह सम्पूर्ण सुरक्षा स्तर-4 मानकों की एक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है। कवच ट्रेनों को खतरे (लाल) पर सिग्नल पार करने और टक्कर रोकने के लिए सुरक्षा प्रदान करने के लिए है। यदि चालक गति सीमा के अनुसार ट्रेन को नियंत्रित करने में विफल रहता है तो यह ट्रेन ब्रेकिंग सिस्टम को स्वचालित रूप से सक्रिय करता है। इसके अलावा, यह ऐसे दो इंजनों के बीच टक्कर को रोकता है, जिनमें कवच प्रणाली काम कर रही है। कवच प्रणाली ट्रेनों को खतरे का सिग्नल पार करने से रोकेगी। ओवर स्पीड से ट्रेन दौड़ाने पर स्वत: ही ब्रेक लग जाएंगे। समपार फाटकों के पास से ट्रेन गुजरेगी तो स्वत: ही सिटी बजना शुरू हो जाएगी। नेटवर्क मॉनिटर सिस्टम के माध्यम से ट्रेन की आवाजाही की केंद्रीकृत लाइव निगरानी होगी।