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यूडीएच मंत्रीजी के शहर कोटा में कब गरजेगा बुलडोजर

कोटा में बरसाती नालों, तालाबों, चम्बल किनारे व सार्वजनिक जगहों पर अतिक्रमण की बाढ़, क्योंकि आला अफसर सो रहे हैं बड़ा सवाल : अफसर अपना काम नहीं कर रहे या अतिक्रमियों से मिले हुए हैं, इसकी जांच होनी चाहिए

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यूडीएच मंत्रीजी के शहर कोटा में कब गरजेगा बुलडोजर

यूडीएच मंत्रीजी के शहर कोटा में कब गरजेगा बुलडोजर

के. आर. मुण्डियार

कोटा.

राज्य के तीसरे बड़े शहर कोटा में बरसाती नालों, चम्बल किनारे, सड़कों व सार्वजनिक जगहों पर अतिक्रमण की बाढ़ आ रखी है। चूंकि कोटा शहर राजस्थान सरकार के नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल का गृह क्षेत्र है, इसलिए यहां अवैध गतिविधियां कतई नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों के लापरवाह अफसर अतिक्रमियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं, इससे अतिक्रमियों के मंसूबे कामयाब हो रहे हैं।

पत्रिका टीम ने मंगलवार को कोटा शहर के कई क्षेत्रों का जायजा लिया तो अमूमन हर बरसाती नाले में अतिक्रमण दिखाई दिए। कुछ कॉलोनियों में नालों पर लोगों ने मकान तक बना लिए। सड़कों व सार्वजनिक जगहों पर भी स्थायी व अस्थायी अतिक्रमण किया जा रहा है। चम्बल नदी के किनारे व ऐतिहासिक तालाब अतिक्रमण के दंश को झेलने को विवश हैं। ऐसा नहीं है कि स्थानीय निकाय के कर्मचारियों व वार्ड प्रभारियों को इसकी जानकारी नहीं है। सूत्रों के अनुसार कुछ जगह तो पार्षद व निकाय कर्मचारियों की मिलीभगत से ही अतिक्रमण हो रहे हैं। दो-चार अतिक्रमियों को बचाने के चक्कर में निगम व यूआईटी प्रशासन किसी के खिलाफ भी कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

ढेरों शिकायतें, लेकिन कार्रवाई नहीं

कोटा शहर के दोनों नगर निगम (उत्तर व दक्षिण), नगर विकास न्यास (यूआईटी) एवं जिला प्रशासन को ढेरों शिकायतें करने के बावजूद अतिक्रमियों पर अंकुश नहीं लग रहा है। लोगों की पीड़ा है कि अतिक्रमण की शिकायतों को अफसर गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। ऐसा लगता है कि अफसरों की अतिक्रमियों से मिलीभगत है।

यह भी पढें: कोटड़ी तालाब को मरने से बचा लो सरकार, अतिक्रमण से घोंटा जा रहा गला

कोटा शहर में अतिक्रमणों का यह है हाल-

- अफसर मूकदर्शक बने रहे और अनंतपुरा तालाब में बस्ती बस गई। अब इस बस्ती को हटाने की हिम्मत कोई अफसर नहीं जुटा पा रहा।

- नदी पार कुन्हाड़ी क्षेत्र एवं किशोरपुरा की तरफ चम्बल नदी किनारे अतिक्रमण बढ़ रहा है। लेकिन इसको रोकने की जहमत कोई नहीं उठा रहा।

- ऐतिहासिक कोटड़ी तालाब में मलबा डालकर पाटा जा रहा है। पक्के निर्माण भी हो चुके हैं।

- थेकड़ा क्षेत्र, बोरखेड़ा, विज्ञान नगर में नालों पर मकान बना लिए गए हैं। नहरों की दीवारों पर भी मकान खड़े हो रहे हैं।

- अधिकतर पुलों के नीचे गुमटी, थड़ी या बाॅडियां इत्यादि लगाकर अतिक्रमण किया जा रहा है। कुछेक जगह पक्के निर्माण भी हो चुके हैं।

- प्रमुख सड़क किनारे फुटपाथ आम लोगों के पैदल चलने केे लिए बनाए गए, लेकिन अधिकतर फुटपाथ पर अतिक्रमण किए जा रहे हैं।

रोज मिलती अतिक्रमण की शिकायत-

- दोनों नगर निगम में हर रोज औसत 3 शिकायतें अतिक्रमण से संबंधित आती हैं।

- नगर विकास न्यास में 3 से 4 शिकायत हर रोज अतिक्रमण की आती हैं।

बोले जिम्मेदार-

नालों, नदी और तालाबों में अतिक्रमण से बारिश के सीजन में बड़ी समस्या होती है। जो लोग नालों पर अतिक्रमण कर रहे हैं, वे बहुत गलत कर रहे हैं। ऐसे निर्माणों को तोड़ने के निर्देश देंगे। हर रोज पालना रिपोर्ट भी ली जाएगी। बारिश से पहले सुधार के प्रयास करेंगे।

- मंजू मेहरा, महापौर, कोटा उत्तर निगम

कोटड़ी तालाब और नालों पर अतिक्रमण के मामले को दिखवाएंगे। कोटड़ी तालाब पर हो रहे अतिक्रमण को रोका जाएगा। तहसीलदार से रेकॉर्ड की जानकारी लेकर इसमें कार्यवाही करेंगे।

- हरिमोहन मीना, जिला कलक्टर एवं नगर विकास न्यास अध्यक्ष, कोटा

सवाल : कोटा शहर में अतिक्रमण बढ़ने के लिए कौन जिम्मेदार है ?

न्यास खुद दोषी, औरों के खिलाफ कार्रवाई कैसे करे-

जिस नगर विकास न्यास (यूआईटी) पर बरसाती नालों व सार्वजनिक जगहों से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी है, वह न्यास खुद ही बरसाती नालों का गला घोंट रहा है। कुछ समय पहले न्यास ने महावीर नगर क्षेत्र में पारिजात कॉलोनी के बरसाती नाले में आवासीय योजना काट दी थी। शहरवासियों व पार्षदों के भारी विरोध के बावजूद न्यास अपनी जिद पर अड़ा रहा और आखिरकार योजना को लांच कर दिया।