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घर के बाहर लिखा वैक्सीनेटेड फैमेली..

टीकाकरण अभियान

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घर के बाहर लिखा वैक्सीनेटेड फैमेली..

घर के बाहर लिखा वैक्सीनेटेड फैमेली..

झालरापाटन. कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। वहीं टीकाकरण को लेकर अभी भी कई लोगों के मन में डर व संशय हैं। टीकाकरण को लेकर फैले इस भ्रम को लोगों के मन से दूर कर उन्हें मंगल टीका लगवाने के लिए कस्बे का एक परिवार अनूठे अंदाज में जागरूक कर रहा हैं। गोपाल घाट मार्ग पुराना पॉवर हाउस के पास निवासी संजय कुमार सोनी ने परिवार के साथ लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए अनूठा तरीका अपनाया हैं। परिवार के सभी सदस्य मंगल टीका लगवाने के बाद अपने घर के बाहर वैक्सीनेटेड फैमेली का पोस्टर लगाकर वहां खड़े होकर आते जाते लोगों को टीकाकरण करवाने की प्रेरणा दे रहे हैं। संजय ने बताया कि राज्य के अन्य जिलों में टीकाकरण के लिए लोग सजग होकर आगे आ रहे हैं। उनके परिवार में उनके साथ उनकी पत्नी मंजू सोनी, व दो पुत्रों अंशुल व वंश ने मंगल टीका लगवा लिया हैं। टीका लगाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।मंजू सोनी का कहना हैं कि कोरोना की बढ़ रही रफ्तार चिंताजनक हैं। ऐसे में संक्रमण से बचने के लिए टीकाकरण ही एकमात्र विकल्प हैं। जिसे युवा वर्ग से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक सभी को अपनाना आवश्यक हैं। प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए।
83 साल की उम्र में कोरोना से जीती जंग
पिड़ावा. कस्बे निवासी पेंशनर अध्यापक जगन्नाथ मोदी ने 83 वर्ष की उम्र होने के साथ 2011 में बायपास सर्जरी के बावजूद कोरोना को चारों खाने चित कर कोरोना से जंग जीती । पेंशनर अध्यापक मोदी ने बताया कि स्वास्थ्य ठीक नहीं लगने पर पुत्रों ने आरटीपीसीआर की जांच कराई। इसमें कोरोना पॉजिटिव निकली। पेंशनर अध्यापक के 40 प्रतिशत फेफड़े खराब हो गए थे। असके बाद भी अध्यापक ने मनोबल कम नहीं होने दिया और खुद को घर में क्वॉरेंटाइन रखा। चिकित्सकों की सलाह पर उपचार जारी रखा। वहीं आयुर्वेदिक काढ़े का सेवन किया। वहीं नियमित अंजीर, मुनक्का सहित बेहतर खान-पान की बदौलत व घर के सदस्यों द्वारा लगातार मनोबल बढ़ाने से कोरोना से जंग जीत ली। उनकी अगली रिपोर्ट नेगेटिव आई। मोदी बताते हैं कि उनके वैक्सीन की दोनों डोज संक्रमित होने से पहले ही लग चुकी थी। इसके कारण सांस लेने में तकलीफ कम हुई। कोरोना मुझे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाया। मेरे परिवार के बाकी सदस्यों में भी कोरोना के हलके लक्षण दिखाई दे रहे थे, लेकिन सभी सदस्यों के वैक्सीन लग चुकी है।