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सूरज निकलने से पहले पानी की लिए शुरू हो जाती है दौड़-भाग

कोटा/मण्डाना. पटारी क्षेत्र में झालावाड़ रोड पर बसे मण्डाना क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच पानी की भारी किल्लत हो गई है। लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल रहा है।

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मंडाना क्षेत्र में पानी की समस्या

सूरज निकलने से पहले पानी की लिए शुरू हो जाती है दौड़-भाग

कोटा/मण्डाना. पटारी क्षेत्र में झालावाड़ रोड पर बसे मण्डाना क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच पानी की भारी किल्लत हो गई है। लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल रहा है। स्थिति यह है कि सूरज निकलने से पहले लोग खाली बर्तन लेकर पानी के लिए इधर-उधर भटकने लग जाते हैं। बच्चों से लेकर बुर्जुग और महिलाएं घण्टों कतार में लगने को मजबूर है। भले ही प्रशासन टैंकरों से जलापूर्ति कर रहा हो, लेकिन वह भी नाकाफी साबित हो रही है।

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एक ओर लोग कोरोनो महामारी के संकट से जूझ रहे है दूसरी ओर बढ़ती गर्मी में कस्बे के कई मोहल्लों में पीने के पानी के लिए मारामारी चल रही है। हालांकि क्षैत्र की प्यास बुझाने के लिए बोराबास पदमपुरा पेयजल योजना तथा कस्बे में 10 टैंकरों से की जा रही जलापूर्ति भी लोगों की प्यास बुझाने में नाकाफ ी साबित हो रही है। कस्बा विभाग की अनदेखी के चलते पानी की समस्या से जूझ रहा है। जलदाय विभाग की ओर से कहीं पाईपलाईन नहीं बिछाई गई तो कहीं कम दबाव से जलापूर्ति होने के कारण कोरोना के खतरे के बीच पानी भरने के लिए भीड़ उमड़ रही है।

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बच्चे बूढ़े सब जुटे रहते हैं
पेयजल समस्या से निजात पाने के लिए बच्चे से लेकर वृद्ध तक पानी के इंतजाम में लगे रहते हैं। छोटे-छोटे बच्चे क्षमतानुसार सिर पर घड़े व गगरे रखकर पानी का इंतजाम कर घरेलू काम में सहयोग कर रहे हैं वहीं वृद्ध भी पीछे नहीं है। कस्बे में अधिकांश हैण्डपम्प खराब पड़े है।

तीन साल में भी कारगर साबित नहीं हुई
लोगों की प्यास बुझाने के लिए बोराबास पदमपुरा योजना से पेयजल आपूर्ति करीब तीन वर्ष पहले शुरू हुई थी, लेकिन योजना से लोगों को प्र्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। कन्वर्जन कस्बे में विभाग की ओर से बोराबास पदमपुरा पेयजल योजना से जलापूर्ति की जा रही है, जहां पाइप लाइन नहीं है वहां टैकरों से जलापूर्ति की जा रही है लेकिन वह भी पर्याप्त नहीं है।

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