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मुकुंदरा में पसरा मातम, एमटी-3 टाइगर की मौत

मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में टाइगर एमटी-3 की मौत के बाद यहां रह रहे वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हुए हैं।  

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कोटा. कोटा जिले में स्थित मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में गुरुवार सुबह से ही मातम पसरा हुआ है। यहां हर कोई दु:खी है। इसका कारण यहां के लाडले टाइगर एमटी-3 की बीमारी के कारण असमय मौत हो गई है। इसकी खबर जैसे ही हाड़ौती के वन्यजीव प्रेमियों को मिली तो शोक की लहर फैल गई। हर कोई टाइगर की मौत के कारणों का जानना चाह रहा था। वन्यजीव प्रेमी डॉ सुधीर गुप्ता ने टाइगर की मौत पर शोक जताते हुए कहा, हाड़ौती के लिए यह दु:खद समाचार है। भविष्य में बाघों की सुरक्षा को लेकर और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। दोपहर में मेडिकल बोर्ड ने टाइगर के शव का पोस्टमार्टम किया। सूत्रों के अनुसार टाइगर तीन दिनों से चलने में दिक्कत हो रही थी। गुरुवार सुबह छह बजे उसकी मौत हो गई। टाइगर ने रिजर्व में महादेव मंदिर के पास उसने अंतिम सांस ली। पोस्टमार्टम के बाद रिजर्व के रेस्ट हाउस के पास ही उसका अंतिम संस्कार किया जाना तय किया गया। मौके पर डीएफओ टी मोहनराज, फील्ड डायरेक्टर आनंद मोहन भी मौजूद रहे। बाघ की मौत से रिजर्व के कार्मिक गम में डूबे नजर आए। मुकुंदरा रिजर्व को दर्शकों के लिए खोला जाता उससे पहले बाघ की मौत हो गई। लोगों का एमटी-3 की अठखेलिया देखने का सपना अधूरा रह गया। करीब तीन माह पहले भी उसकी तबियत खराब हुई थी। सूत्रों के अनुसार उसके मुंह के पास घाव मिला था। उस समय उसके घाव का ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के बद सप्ताह से अधिक समय रिकवरी हो गई। उस समय एमटी-3 बाघ और एमटी-4 बाघिन के बीच या वन्यजीव के संघर्ष से घाव की संभावना भी जताई थी। इसके अलावा पिछले दिनों शिकारी भी दरा में पकड़े गए थे। इसलिए विभाग की ओर से हर पहलू पर जांच कराई जाएगी। इसके लिए सीसीटीवी कैमरों की भी मदद मिल जाएगी। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए रिजर्व में सीसीटीवी कैमरे में भी लगे हुए हैं।