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Women’s Day : कैंसर पीडि़त पति की मौत के बाद घर चलाना था तो कालीबाई ने चलाया ऑटो

न केवल परिवार को संभाला, बल्कि दूसरी हारी हुई महिलाओं में भी जीवन में भी उम्मीद की रोशनी दी

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Women's Day : कैंसर पीडि़त पति की मौत के बाद घर चलाना था तो कालीबाई ने चलाया ऑटो

Women's Day : कैंसर पीडि़त पति की मौत के बाद घर चलाना था तो कालीबाई ने चलाया ऑटो

हुनर कभी हारने नही देता। कोशिश की चाबी से जिंदगी की गाड़ी पटरी पर लौट ही आती है। यह मानना है प्रदेश की पहली महिला ऑटो चालक कालीबाई का। 65 वर्षीय काली बाई ने जीवन में आई परेशानियों को धता बता न केवल परिवार को संभाला, बल्कि दूसरी हारी हुई महिलाओं में भी जीवन में भी उम्मीद की रोशनी दी। कैंसर जैसी गम्भीर बीमारी में पति को खोने के बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी उन्होंने बखूबी संभाली। घर चलाने के लिए उन्होंने ऑटो चलाने का फैसला किया। पहले साइकिल, फिर दो पहिया चलना सीखा। फिर किराए पर ऑटो ले लिया।

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वे कहती हैं कि जब सड़क पर ऑटो लेकर निकलती तो लोग बातें बनाते, लेकिन परवाह नहीं की। धीरे धीरे लोगों की सोच बदली और मेरे काम को सम्मान मिलने लगा। सामाजिक कार्यकर्ता हेमलता गांधी ने भी मेरी मदद की।
प्रेरक वाक्य-बुरे दिन भी गुजर जाते हैं, बस खुश रहो।

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