कोटा. अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क बजट की बाट जोह रहा है। पार्क को पर्यटकों के लिए खोले डेढ़ साल से अधिक हो गया, लेकिन अब तक दूसरे चरण का कार्य शुरू नहीं हो सका है। यहां तक कि योजना के अनुसार वन्यजीवों के लिए निर्धारित पिंजरों की संख्या के आधे कैज भी अब तक नहीं बन सके। पक्षी व सरीसृप वर्ग के अजगर, मगरमच्छ समेत कुछ अन्य प्राणी तो अब भी पुराने चिड़ियाघर में ही हैं।
पुराना चिड़ियाघर पार्क शुरू होने के साथ ही पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था, इससे इन जीवों को पर्यटक व वन्यजीव प्रेमी नहीं देख पा रहे। पार्क के दूसरे चरण के कार्य के लिए करीब 20 करोड़ की दरकार है। सरकार ने इसे जायका (JICA) प्रोजेक्ट में शामिल किया था। इसके माध्यम से कार्य के लिए फंडिंग की जाएगी। विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव भी बनाकर भेज रखे हैं, लेकिन उन पर विचार नहीं किया गया। इससे पार्क का निर्माण आधा-आधूरा हो सका है।
फैक्ट फाइल
-143 हैक्टेयर भू-भाग में फैला हुआ है अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क।
-20 करोड़ की दरकार है दूसरे फेज के निर्माण के लिए।
-44 पिंजरे बनाए जाने हैं अभेड़ा पार्क में।
-13 पिंजरों का ही हुआ अभी तक निर्माण। 05 पिंजरे अभी आधे-अधूरे पड़े हैं।
-12 के करीब प्रजातियों के प्राणी हैं पार्क में।
-03 दशक तक फाइलों में दौड़ता रहा था अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण।
बायोलॉजिकल पार्क ऐसे है आधा अधूरा
अभेड़ा पार्क में दर्जनभर प्रजातियों के शाकाहारी व मांसाहारी जीव हैं। इनमें सांभर, चीतल, नीलगाय, काले हिरण, चिंकारा, बाघ, शेर, पैंथर, भालू, सियार व जरख समेत अन्य प्रजातियों के करीब 90 की संख्या में वन्यजीव हैं। इन्हें पूर्व में बनाए गए 13 पिंजरों में रखा गया है। पक्षियों के लिए बनाए गए 4 पिंजरों का कार्य अभी अधूरा है।
योजना के अनुरूप आधे पिंजरे भी नहीं बनाए जा सके हैं।
दूसरे चरण में 30 के करीब पिंजरों का निर्माण करवाया जाना है। इनके अलावा करीब 2 हैक्टेयर भाग में वॉक थ्रू एवेरी, प्रशासनिक भवन, स्लॉटर हाउस, अस्पताल, इंटर प्रिटक्शन सेंटर, वॉच टावर समेत अन्य निर्माण किया जाना है। पहले चरण में 20 करोड़ के खर्च से चारदीवारी, फुटफाथ, पिंजरे समेत अन्य कार्य करवाए गए।
पुराने चिड़ियाघर को लेकर अभी कोई विचार नहीं
नयापुरा क्षेत्र में करीब 2 हैक्टेयर भाग में 100 वर्ष से अधिक पुराना चिड़ियाघर है। इसमें मगरमच्छ समेत रेप्टेलिया वर्ग व पक्षी हैं। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क का दूसरे चरण का निर्माण कार्य पूर्ण होने पर ये इन प्राणियों को भी शिफ्ट कर दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार भविष्य में इस चिड़ियाघर को किस रूप में काम में लिया जाएगा, फिलहाल तय नहीं हुआ है। पूर्व में यहां रेस्क्यू कर लाए गए वन्यजीवों को रखकर देखरेख करने की चर्चा चली थी, लेकिन विभाग के अनुसार सभी सुविधाएं अभेड़ा में मिलने लगेंगी तो सारा कार्य भी वहीं होगा।
प्रोजेक्ट पर ध्यान दे सरकार
मुकुन्दरा वन्यजीव एवं पर्यावरण समिति अध्यक्ष तपेश्वर सिंह भाटी बताते हैं कि अभेड़ा बायोलॉजिकल प्रोजेक्ट पूर्व में भी वर्षों तक अटका रहा था। पार्क को पर्यटकों के लिए खोले डेढ़ साल से अधिक का समय बीत गया, लेकिन दूसरे चरण का कार्य शुरू नहीं करवाया गया। अब अच्छी संख्या में लोग इसे देखने आने लगे हैं। किसी भी एजेंसी के माध्यम से कार्य हो, लेकिन होना चाहिए। पार्क की पूरी मॉनिटरिंग के लिए प्रशासनिक भवन का निर्माण अन्य कार्यों के साथ जरूरी है। सरकार प्रोजेक्ट पर ध्यान दे।
भेज रखे हैं प्रस्ताव
वन्यजीव विभाग के उपवनसंरक्षक सुनील गुप्ता के अनुसार पार्क के दूसरे चरण का कार्य जल्द शुरू करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने इन कार्यों को जायका प्रोजेक्ट में शामिल किया है। इसके लिए 20 करोड़ के प्रस्ताव बनाकर भेजे जा चुके हैं। बजट मिलने पर कार्य शुरू करवाया जाएगा। दूसरे फेज में कुछ पिंजरों का निर्माण करवाने के साथ प्रशासनिक भवन निर्माण समेत अन्य कार्य करवाए जाने की योजना है।