गत वर्ष खरीफ 2022 के अक्टूबर माह में अत्यधिक वर्षा होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के कई खेतों में मूंगफली सहित अन्य फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी। राज्य सरकार ने विशेष गिरदावरी कराने एवं उचित मुआवजे दिलाने का भरोसा दिलाया था, लेकिन आज भी किसानों को खराब फसलों का मुआवजा मिलने का इंतजार है।
कुचामनसिटी. गत वर्ष खरीफ 2022 के अक्टूबर माह में अत्यधिक वर्षा होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के कई खेतों में मूंगफली सहित अन्य फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी। राज्य सरकार ने विशेष गिरदावरी कराने एवं उचित मुआवजे दिलाने का भरोसा दिलाया था, लेकिन आज भी किसानों को खराब फसलों का मुआवजा मिलने का इंतजार है। किसानों ने साफ तौर पर बीमा कम्पनियों पर मनमर्जी का आरोप लगया है। शहर के निकटवर्ती ग्राम भांवता के करीब 300 किसानों को आज भी मुआवजा का इंतजार है। किसानों ने बताया कि खरीफ-2022 के अक्टूबर माह में अत्यधिक वर्षा होने कारण मूंगफली की फसल खेतों में पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी। राज्य सरकार की ओर बीमा कम्पनियों को आदेश देकर किसानों को मुआवजा देने के निर्देश दिए थे, लेकिन राज्य सरकार के इस आदेश का भी बीमा कम्पनियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा।
किसानों ने बताया कि उस समय बेमौसम बारिश होने के कारण खेतों में जमकर फसल खराबा हुआ। । इसके बाद राज्य सरकार के आदेश पर कृषि विभाग के कर्मचारी तथा फसल बीमा कम्पनी के प्रतिनिधि सर्वे करने खेतों में पहुंचे तो उन्होंने भी 80 प्रतिशत फसल खराबा बताया था, उसके बावजूद बीमा कम्पनी क्लेम देना नहीं चाहती है। किसानों ने बताया कि कई क्षेत्रों में किसानों को खराब हुई फसलों का मुआवजा दे दिया है, लेकिन ग्राम पंचायत भांवता के एक भी किसान को मुआवजा नहीं मिला है।
किसानों में आक्रोश, नहीं हो रही कही भी सुनवाई
किसानों ने आक्रोश जताते हुए बताया कि ग्राम पंचायत भांवता के किसानों को मुआवजा नहीं देने पर किसानों में आक्रोश है। फसलों के बीमा के नाम पर निजी बीमा कम्पनियां धोखाधड़ी कर रही है। किसानों ने बीमा कम्पनियों के खिलाफ कुचामन प्रशासन से लेकर कृषि अधिकारी, सांख्यिकी विभाग, जिला कलक्टर तक चक्कर लगाकर शिकायते कर चुके हैं। किसानों ने इन शिकायतों का भी बीमा कम्पनियों के साथ-साथ अधिकारियों पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा। किसानों ने बताया कि ग्राम पंचायत में अधिकांश किसानों ने फसलों का बीमा करवा रखा है। अधिकारियों ने 80 प्रतिशत तक फसल खराबा बताया था। जबकि अब मुआवजा देने का समय आया तो बीमा कम्पनियां मनमर्जी कर रही है।
फसल बीमा को लेकर कृषि अधिकारियों, सांख्यिकी विभाग व जिला कलक्टर, विधायक व सांसद के कई बार चक्कर लगा । हमारी कही भी सुनवाई नहीं हो रही है। किसानों को फसल खराबा का मुआवजा नहीं मिला तो किसान कर्ज तले दब जाएंगे मजबूरन खेती करना छोड़ना पड़ेगा। राज्य सरकार को इस सन्दर्भ में ध्यान देना चाहिए।
भंवरलाल कड़वा, किसान, ग्राम भांवता
यह भी पढ़ें : हापुस बता बेच रहे सस्ता आम
खरीफ की फसल बेमौसम बारिश के भेंट चढ़ गई थी, लेकिन आज तक हमें मुआवजा का इंतजार है। किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अब आगामी फसल की तैयारी भी नहीं कर पा रहे हैं। जल्द ही किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए।
प्रकाश मोहनपुरिया, किसान, ग्राम भांवता
ग्राम पंचायत भांवता में करीब 80 प्रतिशत फसल खराबा हुआ था। गांव में करीब 300 किसानों ने फसलों का बीमा करवा रखा है। बीमा कम्पनियों के चक्कर लगाकर थक चुके है। हमारी कही भी सुनवाई नहीं हो रही है।
तुलछाराम, किसान, ग्राम भांवता
खरीफ की फसल के दौरान मूंगफली की फसल को कटाई के बाद सूखाने के दौरान बार-बार बरसात हुई थी। इसके कारण फसलों में अत्यधिक खराबा हुआ था। बीमा कम्पनियों की ओर से किसानों मुआवजा देना चाहिए। यह मांग विधायक के द्वारा राज्य सरकार तक पहुंचाएंगे।
देवीलाल मुआवाल, जनप्रतिनिधि, ग्राम पंचायत भांवता
किसान नहीं कर पा रहे आगामी फसल की तैयारी
किसानों ने बताया कि बड़ी मुश्किल से खरीफ की फसल की बुआई की थी, लेकिन फसल खराब होने से किसानों को फायदा तो दूर लागत मूल्य भी नहीं मिला। इसके बाद किसानों ने जैसे-तैसे कर रबी फसल की बुआई कर ली, लेकिन इस बार भी बार-बार हो रही बारिश में फसले व चारा भीगने के कारण उम्मीदों के मुताबिक भाव नहीं मिला। ऐसे में किसानों की आर्थिक स्थिती कमजोर होती चली गई। किसानों को आशा थी कि खराब हुई फसलों का मुआवजा मिल जाएगा तो आगामी फसल की तैयारी कर सकेंगे। किसानों के लिए बड़े-बड़े वायदे करने वाली केन्द्र व राज्य सरकार भी ध्यान नहीं दे रही है।