
नावांशहर. नमक श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर न ही नमक के क्यार, नमक के प्लांट व कम्पनियों के मालिक गंभीर है और न ही अधिकारी। यही कारण है कि इस क्षेत्र में मौत का सिलसिला जारी रहता है। मोट अनुमान के मुताबिक अब तक नावां क्षेत्र में हर साल 2 से 3 मौत नमक का कार्य करते हुए होती है। लेकिन इसे लेकर जिम्मेदार लापरवाह बने हुए है तो श्रमिक यूनियन भी ठंडे बस्ते में है। श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर पत्रिका ने बुधवार को नमक के प्लांटों का जायजा लिया तो श्रमिक मौत के साये में काम करते हुए मिले। इतना ही दो दिन पहले जिस प्लांट पर मौत हुई वहां भी बिना सुरक्षा के श्रमिकों से कार्य करवाया जा रहा था।
नियमानुसार काम पर लगाने से पहले श्रमिकों को प्रशिक्षित करना आवश्यक है। कार्य के दौरान यदि श्रमिक अपनी सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते हैं तो इस पर नजर रखने की जिम्मेदारी भी सुपरवाइजर की होती है। इन सभी पर अधिकांश कंपनियां ध्यान नहीं देती। घटना होने पर सारा दोष श्रमिकों के ऊपर ही मढ़ दिया जाता है। अब तक जितने भी श्रमिकों की मौत हुई है, उनमें से अधिकांश सुरक्षा कमियों की वजह से हुई। यहां कार्यो पर नजर रखने की जिम्मेदारी श्रम विभाग से संबंधित औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य निदेशालय की है। अधिकारियों की नींद तब खुलती है जब कहीं घटना होती है। इसके बाद सभी भूल जाते हैं। दो दिन पहले नमक के प्लांट पर कार्य करते समय करंट की चपेट में आने से एक श्रमिक की मौत हो गई थी। उसके बाद में परिजनों व जिम्मेदारों के सामने शव को लेकर कई समस्याएं नजर आने लगी।
यह भी पढ़ें : Kota Mandi : दाल तड़का हुआ महंगा, जीरा 500 रुपए पार
- नावां-राजास में 50 नमक के प्लांट स्थापित हैं।
- 2 हजार श्रमिकों में महिलाएं पुरुष कार्य करते हैं।
- प्रदेश सहित अन्य राज्यों में नियमित ट्रकों व ट्रेन के माध्यम से होते है नमक सप्लाई।
- अग्मिश्मन से लेकर स्वास्थ्य परीक्षण तक नाकाफी
- श्रमिकों के सत्यापन का जिम्मेदारों के पास नहीं रिकॉर्ड।
इसलिए सत्यापन जरूरी
चार दर्जन से अधिक नमक प्लांटों का जायजा लेने पर अनेक अनियमितताएं सामने आई। इनमें श्रमिकों को बिजली का कार्य करते हुए ग्लब्स तक नहीं दिया हुआ था। प्रथम उपचार व्यवस्था, हाजरी रजिस्ट्रर, अग्निशमन की व्यवस्था नकारा नजर आई। यहां की यूनियन भी इसे लेकर गंभीर नहीं है, जबकि दावे में नगर व श्रमिकों को लेकर हर असुविधा की जिम्मेदारी ली जाती है।
नमक मंडी में करीबन हजारों श्रमिक कार्य करते है। जिनमें महिलाएं व पुरुषों के लिए अलग से शौचालय तक नहीं है। महिला सुरक्षा के इंतजाम भी नकारा है, इससे सरकार व श्रम विभाग के दावे फेल हो रहे है।
हमने श्रम विभाग के अधिकारी को सूचित किया है। इसे संबंध में मौका रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया था। मौका रिपोर्ट तैयार भी की है जल्द ही रिपोर्ट पेश की जाएगी। उसके बाद कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अंशुल सिंह, उपखण्ड अधिकारी नावां शहर
सुरक्षा को लेकर उपाय करना चाहिए। प्लांट वालों से मिलकर चर्चा करेंगे तथा जो समस्या है तो उसमें सुधार करेंगे।
महेश अग्रवाल, अध्यक्ष, प्लांट एसोसिएशन नावां शहर
यह भी पढ़ें : 20 करोड़ की ईमारत बनाई, उद्घाटन की सुध तक नहीं आई
महिलाएं व पुरुषों के लिए नहीं अलग पर्याप्त शौचालय
नावां औधोगिक नगरी है। यहां पर यूपी, बिहार सहित राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों से करीबन 50 हजार श्रमिक काम के चक्कर में रहते है, लेकिन यहां की पुलिस की कार्रवाई करना तो दूर इनके डाटा तक पुलिस के पास उपलब्ध नहीं है। यहां घटनाओं के बाद भी किसी प्रकार का सर्वे जिम्मेदारों द्वारा नहीं किया जाता है।
Updated on:
27 Apr 2023 11:31 am
Published on:
27 Apr 2023 09:23 am

बड़ी खबरें
View Allकुचामन शहर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
