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एम्बुलेंस के इंतजार में घंटों तड़पता रहा दलित, ठेले पर लादकर घर ले गई पत्नी

दलित की हालत गंभीर, दुदुही सीएचसी अस्पताल में करीब चार घंटे से तड़पता रहा 

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Sarweshwari Mishra

Jul 15, 2017

कुशीनगर. सीएम योगी आदित्यनाथ का दलितों के लिए प्राथमिकता के आधार पर सरकारी सुविधा मुहैया कराने के आदेश के बाद भी दलितों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है। कुशीनगर में 159 बस्तियों में रहने वाले करीब ढाई लाख दलित जीते जी मौत की बीमारियां ढोते हुए जीते हैं और उन्हें किसी प्रकार की सरकारी सुविधा नहीं मिल रही है। ऐसी ही एक घटना कुशीनगर के ही एक दलित बस्ती पृथ्वीपुर की है जहां एक बीमार दलित दुदुही सीएचसी अस्पताल में करीब चार घंटे से तड़पता रहा लेकिन उसे एम्बुलेंस की सुविधा नहीं मिली। एम्बुलेंस के इंतजार में इतनी रात हो गई कि वह जिला अस्पताल नहीं जा पाई और उसे एक ठेले पर लादकर किसी तरह परिजनों ने घर ले गए।




बतादें कि दलित की हालत गम्भीर बनी हुई है। स्वास्थ्य कर्मिसों की संवेदनहीनता व उपेक्षा का यह आलम तब है जब प्रदेश के मुख्यमंत्री मुसहर जाति के लोगों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी सुविधाएं देने को आदेश दे रखा है और जिले स्तर पर इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए है।






दुदही सीएचसी के गांव पृथ्वीपुर मुसहरी टोला निवासी कंचन मुसहर काफ़ी दिनों से बीमार चल रहा था। वह पेट के रोग से ग्रसित है। हालत गम्भीर होने पर परिजन उसे सीएचसी दुदही में भर्ती कराए। कंचन की पत्नी चमेली देवी डॉक्टर के पास पर्ची लेकर पहुंची तो डॉक्टर ने मरीज की हालत देखते ही जिला अस्पताल के लिये रेफर कर दिया। लेकिन गम्भीर हालत में तड़पते कंचन को कोई एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराया। परिजन 108 पर फोन कर एम्बुलेंस मांग किया तो उधर से अस्पताल में तैनात चिकित्सक से बात कराने को कहा गया। जब चमेली चिकित्सक के पास बात कराने के लिए पहुंची तो चिकित्सक ने बात करने से न केवल इंकार कर दिया बल्कि फटकार कर भगा दिया। इसका यह हुआ कि करीब चार घण्टे गंभीर रूप से बीमार गरीब मुसहर तड़पता रहा लेकिन किसी भी स्वास्थ्य कर्मी को दया नहीं आई।






शाम को अंधेरा गहराने तक जब जिला अस्पताल जाने की कोई सुविधा नहीं मिली तो इस गरीब मुसहर के परिजन लाचार हो गए। बाजार से गांव जा रहे एक ठेले वाले का अनुनय - विनय कर कंचन को लाद कर परिजन किसी तरह से तीन किमी तक अपने गांव ले आए। जहां कंचन की हालत गंभीर बनी हुई है।





इस सम्बन्ध में सीएचसी प्रभारी से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने इस मामले की कोई जानकारी न होने की बात कह दिए। जिलाधिकारी आन्द्रा वामसी ने भी स्पष्ट रूप से इस मामले में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।