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बडी़ गंडक के कटान से तीन गांवों का अस्तित्व खत्म होने की कगार पर, पलायन कर रहे ग्रामीण

पिछले 10 दिनों से नदी बाघाचौर, नोनिया पट्टी और कचरी टोला गांव को तेजी के साथ काट रही है ।

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Kushinagar Flood

कुशीनगर बाढ़

कुशीनगर. एपी बंधे के किनारे बसे तीन गांवों का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर है। बड़ी गंड़क नदी के तेजी से कटान करने के कारण नोनिया पट्टी ,बाघाचौर व कचरी टोला में बसे लोगों के घर नदी की जलधारा में विलीन होते जा रहे हैं, इन गांवों के अब तक 50 से अधिक घर नदी में समा चुके हैं, घर नदी की धारा में विलीन होने के बाद पीड़ित प्लास्टिक लगाकर रहने को मजबूर हैं।

मेहनत से बनाए गए अपने सपने के घरों को ग्रामीण अपने ही हाथों से तोड़कर मिले ईंट, छड़ व छप्पर के साथ पलायन कर रहें हैं, इसके बावजूद भी जिले के बाढ़ खंड की ओर से इन गांवों को बचाने का कोई ठोस उपाय नहीं किया जा रहा जबकि नदी पिछले वर्ष भी इन गांवों के पास कटान की थी। यही नहीं अमवा बंधे के जीरो प्वाइंट पर बचाव कार्य तब शुरू किया गया जब बरसात का मौसम शुरू हो गया। यह हालत तब है जबकि प्रदेश के दो मंत्री धर्मपाल सिंह और स्वाति सिंह एपी व अमवा खास बंधे का कई मर्तबा दौरा कर चुकी हैं।

बता दें कि एपी बंधे के उसपार बसे बाघाचौर, कचहरी टोला और नोनिया पट्टी गांव से नारायणी नदी कभी काफी दूर थी. लोग पक्के मकानों निर्माण करा कर बड़े ही आराम से अपनी जिंदगी बीता रहे थे. परंतु बाढ़ खंड के अभियंताओं की अदूरदर्शिता से नदी इन गांवों तक पहुंच गई और पिछले वर्ष नारायणी नदी ने बाघाचौर, नोनिया पट्टी गांव के कई घरों को अपने अंदर समाहित कर लिया. जिले के बंधों का दौरा करने आईं मंत्री स्वाति सिंह व सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह को एपी व अमवा खास के किनारे बसे लोगों सुरक्षा का आश्वासन देने के साथ समय से बचाव कराने के लिए अभियंताओं को सख्त निर्देश दिया था, इस सख्त निर्देश का असर इतना हुआ कि वर्ष 2017-18 में जिले का बाढ़ खंड कोई निर्माण नहीं कराया और ग्रामीणों को भगवान भरोसे छोड़ दिया।

इसका नतीजा यह हुआ कि पिछले 10 दिनों से नदी बाघाचौर, नोनिया पट्टी और कचरी टोला गांव को तेजी के साथ काट रही है। अब तक तीनों गांवों के काफी घरों अपनी जलधारा में बहा ले गई है। नदी के तेवर और बाढ खंड के अभियंताओं की उदासीनता देखकर ग्रामीण अपने ही हाथों अपने घरों को तोड़ रहे हैं और गांव से पलायन कर रहे हैं। बंधों किनारे बसे ग्रामीणों में हाहाकार मचा हुआ है। जिले के बाढ़ खंड को इन गांवों पर नजर तब गई जब हालात बेकाबू हो गये और झमाझम बारिश होने लगी, बरसात के चलते बोल्डर तक कटान स्थल तक ले जाने में कठिनाई हो रही है। इन गांवों को बचाने के लिए बाढ खंड केवल बचाव कार्य करने का दिखावा कर रहा है। दिन में थोडा बोल्डर कटान स्थल पर डालकर ठेकेदार सरक ले रहा है.रात में कोई बचाव कार्य नहीं हो रहा है। बाढ़ खंड के अभियंता यह मान लिए हैं कि इन तीनों गांवों को बचाया नहीं जा सकता है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता ही कह रहे हैं कि उनकी जिम्मेदारी बंधे को बचाना है. गांव को बचाना उनकी जिम्मेदारी नहीं है।

BY- A.K. MALL

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