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भदोही के बाद कुशीनगर में भी स्कूली वैन चालक के ईयरफोन लगा कर वाहन चलाने के चक्कर में गयी मासूम बच्चों की जान

बच्चों ने ट्रेन देख कर चालक से वाहन रोकने को कहा था, ईयरफोन के चलते चालक को ट्रेन व बच्चों की नहीं सुनायी दी आवाज

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Kushinagar Accident

Kushinagar Accident

कुशीनगर. भदोही में दो साल पहले मानवरहित रेलवे क्रासिंग पर स्कूली वैन व ट्रेन की टक्कर में आठ बच्चों की जान चली गयी थी। कई बदनसीबों के घर का चिराग बुझ गया था। ईयरफोन लगा कर वैन चला रहे चालक ने ट्रेन की आवाज तक नहीं सुनी थी। इस घटना से सरकार व स्कूली वैन चालक ने कोई भी सबक नहीं सीखा। यदि भदोही की घटना को गंभीरता से लिया जाता तो कुशीनगर के १६ बच्चों की जान बच जाती। स्थानीय लोगों की माने तो कुशीनगर में हुए हादसे के लिए चालक भी जिम्मेदार है। चालक ईयरफोन लगा कर स्कूली वैन चला रहा था बच्चों ने भी ट्रेन देख कर चालक से वहान रोकने को कहा था लेकिन चालक ने ईयरफोन के चलते ट्रेन व बच्चों दोनों की आवाज नहीं सुनी और इतना बड़ा हादसा हो गया।
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कुशीनगर में हुए हादसे के बाद सीएम योगी भी मौके पर पहुंच गये हैं। सीएम योगी ने खुद मीडिया के सामने कहा है कि दुर्घटना में चालक की लापरवाही की बात सामने आ रही है, यदि चालक ईयरफोन लगा कर स्कूली वैन नहीं चलाता तो बच्चों की जान बच सकती थी। सीएम योगी की बात से साफ हो जाता है कि भदोही की तरह कुशीनगर में भी मानवरहित रेलवे क्रासिंग के बाद चालक का ईयरफोन ही बच्चों की मौत का कारण बना है। बड़ा सवाल है कि यातायात नियमों को ताक पर रख कर कब तक स्कूली वैन चालक ईयरफोन लगा कर बच्चों के मौत का कारण बनते रहेंगे। ट्रैफिक पुलिस व स्कूल चालकों पर कब ऐसे चालकों को लेकर कार्रवाई होगी। जिन लोगों के घर का चिराग बुझ गया है, उनसे पूछे तो पता चलेगा कि चालक की एक गलती ने उनकी जिंदगी में हमेशा के लिए अंधेरा ला दिया है। मौसमी अभियान की तरह जिला प्रशासन के लोग स्कूली बस की फिटेनस व चालकों की जांच करते हैं लेकिन इसका कोई फायदा नहीं होता है। स्कूल संचालक भी इतनी सख्ती नहीं कर पाते हैं कि ईयरफोन लगा कर स्कूली वैन चलाने वालों को नौकरी से निकाला जा सके। सरकार की शिथिलता के चलते ही भदोही के बाद कुशीनगर हादसा हुआ है यदि अब भी सरकार की आंख नहीं खुली तो आने वाले समय में ऐसी और दुर्घटनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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