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Kushinagar News: कुशीनगर में बीच रास्ते खराब हो गई एम्बुलेंस, लोग धक्का ही लगाते रहे, एक मरीज ने…

Kushinagar News: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में सीएचसी से रेफर किए गए मरीज को लेकर जा रही एंबुलेंस बीच रास्ते खराब हो गई। काफी प्रयास के बाद भी जब एंबुलेंस स्टार्ट नहीं हुई तो मरीज के परिजनों ने उसमें धक्का लगाना शुरू किया।

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Patient died breakdown ambulance midway in Kushinagar

कुशीनगर में खराब एंबुलेंस में धक्का लगाते मरीज के परिजन।

Kushinagar News: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में सीएचसी से रेफर किए गए मरीज को लेकर जा रही एंबुलेंस बीच रास्ते खराब हो गई। काफी प्रयास के बाद भी जब एंबुलेंस स्टार्ट नहीं हुई तो मरीज के परिजनों ने उसमें धक्का लगाना शुरू किया। फिर भी गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई तो दूसरी एंबुलेंस के लिए प्रयास किया। मामला जब एम्बुलेंस के प्रोग्राम मैनेजर तक पहुंचा तो उन्होंने दूसरी एम्बुलेंस मौके पर भेज दी। परिजनों का आरोप है कि दूसरी एम्बुलेंस आने में करीब दो घंटे लग गए। इसके चलते उनके मरीज की मौत हो गई। मामला तीन दिन पुराना बताया जा रहा है।

पटहेरवा थाना क्षेत्र के बलुआ शमशेर शाही निवासी मोहन शर्मा के 17 वर्षीय पुत्र बबलू का अचानक तबीयत बिगड़ गया और उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। परिजन उसे इलाज के लिए सीएचसी फाजिलनगर लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन उसे सरकारी एम्बुलेंस से जिला अस्पताल के लिए निकले, लेकिन कुछ ही दूरी पर एम्बुलेंस खराब हो गई।

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इसके बाद परिजन एम्बुलेंस को धक्का देने लगे। काफी प्रयास के बाद भी एम्बुलेंस चालू नहीं हो सकी। इस बीच परिजन दूसरे एम्बुलेंस के लिए प्रयास करने लगे और जिस नम्बर पर बात हुई थी, उस पर दोबारा बातचीत कर मरीज की हालत काफी नाजुक बताते हुए तत्काल एम्बुलेंस भेजने की गुहार लगाई। जब मामला एम्बुलेंस प्रोग्राम मैनेजर सचिंद्रनाथ चौधरी तक पहुंचा तो उन्होंने तमकुहीराज से दूसरी एम्बुलेंस भेजी।

दो घंटे देरी से पहुंची दूसरी एंबुलेंस, मरीज की हो गई मौत
परिजनों का आरोप है कि दूसरी एम्बुलेंस के आने में करीब दो घंटे का वक्त लग गया और मरीज बबलू की लगातार हालत बिगड़ती चली गई। जब दूसरी एम्बुलेंस वहां पहुंची तो मरीज बबलू को उसमें शिफ्ट किया जाने लगा। इसी दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक के पिता का आरोप है लापरवाही के चलते ही उनके बेटे की मौत हुई है। अगर समय से एम्बुलेंस आ गई होती तो उनके बेटे को जिला अस्पताल शीघ्र पहुंचाई जा सकती थी और उपचार भी शुरू हो जाता।

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उन्होंने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। वहीं फाजिलनगर सीएचसी के अधीक्षक डॉ. यूएस नायक का कहना है कि मरीज को सांस लेने के साथ पेट में भी परेशानी थी। प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। इसके बाद की घटना की कोई जानकारी हमें नहीं है।

सामान्य से कम था ऑक्सीजन लेवल, लापरवाही का आरोप निराधार
कुशीनगर के सरकारी एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम मैनेजर सचिंद्रनाथ चौधरी ने बताया "24 घंटे और सातों दिन एम्बुलेंस सड़कों पर लोगों की सेवा में दौड़ती है। उस दिन एम्बुलेंस का एक्सल टूट गया था। एम्बुलेंस में मरीज होने की जानकारी के बाद मेरे द्वारा तमकुहीराज से एक दूसरी एम्बुलेंस को मौके पर भेज दी गई थी।

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ईएमटी ने भी मरीज को बचाने की पूरी कोशिश की। मरीज की स्थिति बेहद ही नाजुक थी। ऑक्सीजन लेवल सामान्य से भी कम था। लापरवाही का आरोप निराधार है। एम्बुलेंस व उसके कर्मी लोगों की सहायता के लिए ही होते हैं।"