
पटहेरवा थाने का डूम्मरभार गांव गम में डूबा
कुशीनगर. मनहुस बुधवार की सुबह सड़क दुर्घटना में हुई तीन महिलाओं की मौत से कुशीनगर जनपद का डूम्मरभार गांव रो रहा है। पूरा गांव उदासी की चादर में लिपटा हुआ है। गम इतना गहरा है कि सारी तैयारियों के बावजूद गांव के लोग इसबार छठ पर्व को नहीं मना रहे हैं। छठ के अवसर पर गुलजार रहने वाला घाट सुना पड़ा रो रहा है। बता दें कि, जिले के पटहेरवा थाने के गांव में डाला छठ पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता रहा है. इस वर्ष भी छठ पूजा के लिए गांव में जोरदार तैयारी चल रही थी। घाट को साफ करा दिया गया था। छठ वेदी का रंग- रोगन कर किया जा रहा था।छठ पूजा के सामान खरीद लिए गए थे। इन तैयारियों के बीच बुधवार की सुबह करीब 5 बजे आई मनहुस घड़ी में एेसा दर्दनाक हादसा हुआ कि पूरा गांव गम में डूब गया। सुबह राष्ट्रीय राजमार्ग पर टहलने निकली डुम्मरभार की तीन व्रती महिलाओं को एक बस ने रौंद दिया। छोटी छठ के दिन तीन व्रती महिलाओं रामरती देवी, रमावती देवी व सोना देवी की दर्दनाक मौत की खबर सुनते ही पूरा गांव आंसुओं में डूब गया।
छठ पर्व को लेकर उल्लास के माहौल डूबा गांव गम से सिसकने लगा। मार्ग दुर्घटना में काल के गाल में समाई रामरती देवी, रामवती व सोना के घर में भी छठ को लेकर तैयारियां जोरों पर थी। रामरती के भतीजे लालबाबू कुशवाहा के घर कुछ ही दिन पूर्व बेटी का जन्म हुआ था। इसी खुशी में धूमधाम से छठ मनाने की तैयारी थी। रामवती देवी के यहां भी लगभग पांच माह पूर्व खुशियों ने तब दस्तक दी थी। जब उनकी दो बहुओं ने कम दिनों के अंतर पर पोते को जन्म दिया था। पोते हिमांशु और प्रिंस की छठ में कोशी भरने की तैयारी जोरों पर थी... सोना देवी के घर उसके बेटे सचिन की भी कोशी भरी जानी थी लेकिन दुर्घटना के चलते हर्ष-उल्लास का यह माहौल अचानक गम में बदल गया। एक साथ हुई तीन मौतों से गम में डूबे गांव वालों ने छठ पूजा को नहीं मनाने का निर्णय ले लिया। गांव की महिलाएं भी इतनी दुखी है कि वह छठ पूजा नहीं करेंगी।
input- अवधेश कुमार मल्ल
Published on:
26 Oct 2017 06:19 pm
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