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योगी सरकार का बड़ा फैसला, दुधवा टाइगर फाउंडेशन से विकसित होगा ईको-टूरिज्म

अब दुधवा नेशनल पार्क के पर्यटकों से होने वाली आय सरकार के खाते में ना जमा होकर फाउंडेशन के फंड में जाएगी।

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lakhimpur

लखीमपुर खीरी. दुधवा टाइगर फाउंडेशन को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद जिले में ईको-टूरिज्म विकास और बाघ संरक्षण के प्रयासों को नए आयाम मिलने की संभावना और बढ़ती जा रही है। बाघ संरक्षण और पर्यावरण विकास के लिए अब दुधवा खुद आत्मनिर्भर बन सकेगा। छोेटे-छोटे काम के लिए सरकार से वित्तीय स्वीकृति आदि लेने के झंझटों से मुक्ति मिलने वाली है। बाघों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास खाद्य श्रंखला और जंगल के इकोसिस्टम के सुधारों में भी अब गति मिल सकती है। अब दुधवा नेशनल पार्क के पर्यटकों से होने वाली आय सरकार के खाते में ना जमा होकर फाउंडेशन के फंड में जाएगी। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और एनजीओ आदि से मिलने वाला अनुदान भी दुधवा टाइगर फाउंडेशन सीधे प्राप्त कर सकेगा। जबकि पहले छोटे-छोटे कामों के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन को वित्तीय स्वीकृति लेने में महीनों लग जाते थे। अब ऐसी समस्याओं से निजात मिलेगी। अब बाघों के संरक्षण कार्यक्रम को भी प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।


अब विकास की बढ़ेगी संभावनाएं दुधवा टाइगर फाउंडेशन के जरिए जिले में ईको-टूरिज्म का विकास होगा। इससे होटल रेस्टोरेंट समेत व्यवसाय बढ़ने से स्थानीय लोगों की आय में भी इजाफा होगा। साथ ही लोगों को मिलने वाली सुविधाओं का विस्तार होगा। इसके लिए सरकार का मुंह नहीं देखना पड़ेगा। ग्रासलैंड और वेटलैंड का हो सकेगा विकास बाघों की आबादी बढ़ने के लिए वन्यजीवों के संखला को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इसके लिए जंगल के अंदर ग्रासलैंड और वेटलैंड का विकास दुधवा टाइगर फाउंडेशन के जरिए किया जाएगा। घास के मैदान और जलाशयों के विकास से हिरण आदि शाकाहारी जीवो को पर्याप्त भोजन मिल सकेगा। शाकाहारी जीवो की संख्या बढ़ने से बाघो के लिए भी भोजन की कमी नहीं होगी। इस से बाघों की आबादी बढ़ने की मदद मिलेगी। साथ ही कम होगा इंसानों और बाघों की भी संघर्ष।