
प्रेस वार्ता में अव्यवस्था पर भड़के विधायक, कुर्सी न मिलने से नाराज़ होकर कार्यक्रम छोड़ बाहर निकले योगेश वर्मा (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
BJP MLA Yogesh Verma: जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक सरकारी प्रेस वार्ता उस समय असहज स्थिति में बदल गई, जब भारतीय जनता पार्टी के सदर विधायक योगेश वर्मा कुर्सी न मिलने से नाराज़ होकर कार्यक्रम के बीच ही बाहर निकल गए। यह प्रेस वार्ता सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जी राम जी योजना’ को लेकर आयोजित की गई थी, जिसमें प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री नितिन अग्रवाल की उपस्थिति प्रस्तावित थी। विधायक के अचानक बाहर जाने से प्रशासनिक अमले और पार्टी कार्यकर्ताओं में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना उस समय हुई जब कलेक्ट्रेट सभागार में प्रेस वार्ता की तैयारियां चल रही थीं। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पार्टी पदाधिकारियों और मीडिया कर्मियों की मौजूदगी थी। इसी दौरान सदर विधायक योगेश वर्मा सभागार में पहुंचे, लेकिन उन्हें बैठने के लिए कुर्सी उपलब्ध नहीं कराई गई। काफी देर तक इंतजार के बाद भी जब उनके लिए व्यवस्था नहीं हो सकी तो वे असंतोष जताते हुए कार्यक्रम स्थल से बाहर निकल गए।
सभागार से बाहर निकलने के बाद विधायक योगेश वर्मा ने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में अपनी नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जब कुर्सी ही नहीं है तो जाकर क्या करें? यह सम्मान की बात होती है। विधायक कोई आम व्यक्ति नहीं होता, उसके लिए न्यूनतम व्यवस्था होनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी और पार्टी कार्यकर्ता सकते में आ गए। कुछ ही पलों में स्थिति को संभालने के लिए अधिकारी इधर-उधर दौड़ते नजर आए, लेकिन तब तक विधायक कार्यक्रम छोड़ चुके थे।
इस घटना ने जिला प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस प्रेस वार्ता में राज्य सरकार की एक अहम योजना का प्रचार-प्रसार किया जाना था, वहीं मूलभूत व्यवस्थाओं की कमी सामने आना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।जनप्रतिनिधियों के लिए समुचित बैठक व्यवस्था न होना न केवल कार्यक्रम की गरिमा को प्रभावित करता है, बल्कि सरकार और पार्टी की छवि पर भी असर डालता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसे आयोजनों में प्रोटोकॉल का पालन बेहद जरूरी होता है। एक निर्वाचित विधायक को बैठने की व्यवस्था न मिलना न सिर्फ असम्मानजनक है, बल्कि यह प्रशासन और आयोजन समिति की गंभीर चूक को भी उजागर करता है।
विधायक के बाहर निकलते ही सभागार के भीतर और बाहर दोनों जगह हलचल मच गई। पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति को संभालने की कोशिश में जुट गए। कुछ कार्यकर्ताओं ने विधायक को मनाने का प्रयास भी किया, लेकिन वे वापस कार्यक्रम में नहीं लौटे। बताया जा रहा है कि ऊर्जा मंत्री नितिन अग्रवाल के आगमन से पहले ही यह घटना हो गई, जिससे कार्यक्रम की गंभीरता और अधिक बढ़ गई। हालांकि बाद में प्रेस वार्ता निर्धारित एजेंडे के अनुसार आयोजित की गई, लेकिन विधायक की गैरमौजूदगी लगातार चर्चा का विषय बनी रही।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों ने इसे प्रशासनिक अराजकता और सत्तारूढ़ दल के भीतर समन्वय की कमी का उदाहरण बताया है। वहीं भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह एक “तकनीकी चूक” थी, जिसे समय रहते सुधारा जा सकता था। हालांकि विधायक योगेश वर्मा का कार्यक्रम छोड़ना यह संकेत देता है कि वे इस चूक को हल्के में लेने के मूड में नहीं थे। उनका रुख यह भी दर्शाता है कि जनप्रतिनिधियों के सम्मान और प्रोटोकॉल को लेकर वे किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।
यह पहली बार नहीं है जब किसी सरकारी या राजनीतिक कार्यक्रम में व्यवस्थाओं को लेकर विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी प्रदेश के कई जिलों में मंच व्यवस्था, बैठक प्रबंध और प्रोटोकॉल को लेकर जनप्रतिनिधियों की नाराज़गी सामने आती रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों से बचने के लिए प्रशासन को कार्यक्रम से पहले पूरी तैयारी और समन्वय सुनिश्चित करना चाहिए।
Updated on:
12 Jan 2026 09:22 am
Published on:
12 Jan 2026 03:53 am
बड़ी खबरें
View Allलखीमपुर खेरी
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
