
लखीमपुर खीरी. फाइलेरिया नियंत्रण एवं ऑफ ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन पर बुधवार को एक कार्यशाला का आयोजन कराया गया। कार्यक्रम में सीएमओ, एडिशनल सीएमओ, डीएमओ सहित स्वास्थ विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।
मच्छर काटने से फैलता है रोग
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी अश्वनी कुमार सिंह और जिला मलेरिया अधिकारी एसके वर्मा ने बताया कि फाइलेरिया क्या और कितनी गम्भीर बीमारी है। इस संम्बंध में कार्यशाला में मौजूद लोगों को विधिवत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया रोग उत्तर प्रदेश समेत 16 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधित गंभीर समस्या है। साथ ही यह एक खतरनाक रोग भी है, जिस कारण शरीर के अंगों में सूजन आ जाती है। जबकि इस रोग से आसानी से बचा जा सकता है। यह रोग मच्छर के काटने से फैलता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार फाइलेरिया दुनिया भर में विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। यह एक संक्रामक लिफैस्टिक सिस्टम को नुकसान पहुचता है। अगर इसका उपचार नही कराया गया, तो इससे शरीर के अंगों में सूजन आ जाती है। फैलेरिस से जुड़ी विकलांगता जैसे लिफाइडिमा (पैरों में सूजन) और हाइड्रोसिल (अंडकोष की थैली में सूजन) के कारण पीडित लोगों को अक्सर सामाजिक बोझ सहना पड़ता है। इससे उनकी आजीविका व काम करने की छमता प्रभावित होती है।
भारत सरकार ने 2004 से देशभर में लिम्फेटिक फाइलेरियासिस के संक्रमण से बचाव के लिए सभी प्रभावी जिलों में मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) राउंड आयोजित किया है। एमबीए के दौरान डब्ल्यूएचओ के अनुशासित की गई। दवाइयों, डाइथेलकाबामोजाइन साइट्रेड (डीईसी) और एल्बेंडाजोल उन सभी लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि 14 से 20 नवम्बर तक 20 जिलों में ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) राउंड चलाया जाएगा।
फाइलेरिया के लक्षण
सामान्य तौर पर इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। बुखार, बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग में उनके आसपास दर्द या सूजन, पैरों में हाथों में सूजन हाथ पांव और हाइड्रोसील में सूजन इसके लक्षण होते हैं।
फाइलेरिया की दवाई कैसे करती है काम
फाइलेरिया की दवाई परजीवियों को मार देती है। मरते हुए परजीवियों के प्रतिक्रिया स्वरुप कभी-कभी सर दर्द, शरीर में दर्द, बुखार उल्टी तथा बदन पर चकत्ते और खुजली जैसी मामूली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती है।
जरूरी बातें
एमडीए की दवा सरकार द्वारा साल में एक बार घर घर तक जाती है। डीईसी की गोली खाली पेट नहीं खाना चाहिए और अल्बेंडाजोल की गोली को चबाकर खाना चाहिए। 2 साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिला और गंभीर रोग से पीड़ित की कोई दवाई नहीं खानी चाहिए।
Published on:
14 Nov 2018 06:45 pm
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