
Ayushmann Khurranas Article 15: Ayushmann Reacts to Criticism
लखीमपुर-खीरी. अखिल भारतीय ब्राम्हण महासभा ने 28 जून को रिलीज होने वाली फिल्म आर्टिकल 15 को ब्राम्हण विरोधी बताते हुए राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा है। तहसीलदार अनिल कुमार यादव को दिए गए ज्ञापन में ब्राम्हण महासभा ने कहा है कि 28 जून को रिलीज होने वाली फिल्म आर्टिकल 15 में बदायूं के गैंगरेप पर आधारित घटना दिखाई गई है, जिसमें ब्राम्हण जाति के लड़कों पर आरोप लगाए गए हैं। फिल्म में ब्राम्हण जाति के बारे में तोड़ मरोड़कर पेश किया गया। जिससे ब्राम्हण समाज काफी बदनाम हो रहा है। ज्ञापन में किसी विशेष जाति पर निशाना न साधने, ब्राम्हण विरोधी कथनों पर रोक लगाने या संशोधन किए जाने की मांग की गई है। इस दौरान महासभा के ब्लाक अध्यक्ष सुनील शुक्ला, विधानसभा अध्यक्ष वीरू मिश्रा, दयानंद मिश्रा, महेन्द्र अवस्थी, सौरभ मिश्रा, श्रीष द्विवेदी, आशीष अग्निहोत्री, दीपक पांडेय, रिंकू अवस्थी, संजय अवस्थी, अमित शुक्ला, रामलखन मिश्रा, सक्षम शुक्ला, अभिषेक शुक्ला, अजय कुमार चौबे सहित भारी संख्या में ब्राम्हण मौजूद रहे।
जानिये क्या है बदायूं घटना
27 मई, 2014 को बदायूं जिले में दिलदहला देने वाली घटना घटित हुई थी। यहां के कटरा सादतगंज गांव में दो नाबालिग चचेरी बहनों का गैंगरेप हुआ था। देर शाम शौच जाने की बात कहकर दोनों बहनें घर से निकलीं। लेकिन रात होने तक भी घर नहीं पहुंची। परिजनों ने दोनों की तलाश करना शुरू कर दिया। रात करीब एक बजे दोनों का शव पेड़ से लटका पाया गया। परिवार जब इस मामले को लेकर पुलिस के पास पहुंचा, तो पुलिस वालों ने एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया। घरवालों के मुताबिक इस घटना में पुलिसवाले भी आरोपियों के साथ मिले हुए थे।
जमकर हुई थी सियासत
बदायूं गैंगरेप कांड पर जमकर सियासत हुई थी। किशोरियों के अनुसूचित जाति की बात प्रचारित हुए तो बसपा सुप्रीमो मायावती परिजनों से मिलने गांव पहुंच गईं। जाति की बात आने से इस खबर को इंटरनेशनल मीडिया में भी उछाला गया। बाद में पता लगा कि किशोरियां पिछड़ी जाति के परिवार से थीं। उसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आए। यह घटना बड़े स्तर पर मुद्दा बनकर उभरी थी, जिसमें जमकर सियासत हुई थी। कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। केस में कुल पांच आरोपियों को रेप और मर्डर के केस में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें से तीन गांव के लड़के और दो पुलिस कांस्टेबल थे।
यह घटना बढ़ती ही गई। मामले ने तूल पकड़ा तो एसआईटी जांच गठित हुई। आरोपियों को जेल भेजा गया। उस वक्त तत्कालीन अखिलेश सरकार पर दबाव बढ़ता गया। लॉ एंड ऑर्डर के स्तर को लेकर अखिलेश सरकार की खूब फजीहत हुई। जांच सीबीआई को सौंपी गई मगर वह किसी नतीजे पर न पहुंच सकी। दिसंबर 2014 में सीबीआई ने इसे आत्महत्या का केस बताकर क्लोज कर दिया। सीबीआई के मुताबिक लड़कियों का गांव के ही किसी लड़के से अफेयर था। इस बात की भनक घरवालों को लग गई थी और उनके गुस्से से बचने के लिए लड़कियों ने आत्महत्या की। पीड़ित परिवार ने इसका विरोध किया। अदालत में चुनौती दी। यह मामला हाईकोर्ट तक ले जाया गया। आखिर में पॉक्सो कोर्ट ने रिपोर्ट खारिज कर दी। बाद में आरोपियों पर से सभी चार्ज हटा लिए गए।
Updated on:
08 Jun 2019 05:34 pm
Published on:
08 Jun 2019 05:01 pm
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