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मेडिकल कॉलेज कैम्पस में इनोवेशन फंड स्टार्टअप समिट 2019 की हुई शुरुआत

जिले के मेडिकल कॉलेज कैम्पस में इन्नोवेशन एंड स्टार्टअप सम्मिट 2019 के तीन दिवसीय मेले की शुरुआत हुई ।

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lakhimpur

मेडिकल कॉलेज कैम्पस में इनोवेशन फंड स्टार्टअप समिट 2019 की हुई शुरुआत

बांदा. जिले के मेडिकल कॉलेज कैम्पस में इन्नोवेशन एंड स्टार्टअप सम्मिट 2019 के तीन दिवसीय मेले की शुरुआत हुई । आईआईटी कानपुर के पूर्व कुलपति कृपा शंकर ने फीता काटकर इस मेले उद्घाटन किया । इस मेले में बाँदा डीएम की संवेदनहीनता भी देखने को मिली है जहाँ डीएम द्धारा इस इन्नोवेशन के लिए मेडिकल कैम्पस को चुना गया गया है जिसमे कॉलेज कैम्पस में पोस्ट-मार्टम हॉउस के चंद कदम की दूरी पर गीत गाये जा रहे थे और मंच पर डीएम साहब भी मौजूद थे, वही कुछ ही दूरी पर आइसीयू और पोस्ट-मार्टम भी है जहाँ मरीजों का उपचार चल रहा था और लाशो का पोस्ट-मार्टम हो रहा था जिसमे परिजन अपनों से बिछड़ने के गम में आँसू बहा रहे थे ।

आपको बतादे की बुंदेलखंड को दृष्टिगत रखते हुए इन्नोवेशन एंड स्टार्टअप सम्मिट 2019 की बाँदा में तीन दिवसीय मेले के आयोजन होना था जिसके लिए बाँदा डीएम द्धारा शहर के नरैनी रोड स्थित मेडिकल कॉलेज कैम्पस में इसका शुभारम्भ किया गया । इस सम्मिट में लगभग 2000 से अधिक काउंटर लगाए गए हैं, ये काउंटर विभिन्न सरकारी एवं सामाजिक संस्थाओं के हैं । बाँदा शहर में कई ऐसे स्थान है जहाँ पर इस इन्नोवेशन का शुभारम्भ किया जा सकता था पर शायद डीएम साहब को मेडिकल कॉलेज कैम्पस ही उचित लगा । कॉलेज कैम्पस में आज पहले दिन हजारों लोग आये व सम्मिट का लाभ उठाया । मेडिकल कॉलेज कैम्पस के अंदर पोस्ट-मार्टम हॉउस भी बना हुआ है, पोस्ट-मार्टम हाउस के चंद कदम की दूरी पर मंच में गीत गाये जा रहे थे और इस मंच में डीएम साहब भी मौजूद थे, वही दूसरी तरफ पोस्ट-मार्टम हॉउस में मृत लोगों के परिजन लाश का पोस्ट-मार्टम करवाने आये हुए थे, एक तरफ गीत चल रहे थे और दूसरी तरफ मृत के परिजनों का रोना-बिलकना चल रहा था, पर शायद हमारे डीएम साहब को ये सब दिखाई नहीं दिया और परिजनों की चीखे भी गीतों की धुन में सुनाई नहीं दी । इतना ही नहीं मेडिकल कॉलेज में मरीजो को भी प्रवेश में इलाज करवाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा । मरीज आइसीयू में हो या फिर किसी मरीज की हालत सीरियस हो, किसी अधिकारी या नेता को इससे कोई मतलब नहीं था, सभी इस सम्मिट में लगे रहे । ये सम्मिट तीन दिवसीय है, इन तीन दिनों में अस्पताल में आये वाले मरीजों को, पोस्ट-मार्टम में आने वाले परिजनों को और अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों को कितनी परेशानिया होंगी इससे किसी को कोई मतलब ही नहीं दिखाई दिया । इस संम्मित के बारे में डीएम और मुख्य अतिथि कानपुर आईआईटी के कुलपति ने इस सम्मिट के फायदे और उपलब्धिया गिनाई पर किसी ने भी मरीनों और पोस्ट-मार्टम के परिजनों के बारे में नहीं सोचा । या फिर ऐसा मान लिया जाये की हमारे डीएम साहब को शहर में कोई दूसरा मैदान ही नहीं मिला, इसपर एक बड़ा सवाल खड़ा होता है की क्या मेडिकल कॉलेज मरीजो की सुविधा के लिए है या फिर सम्मिट मेले और नाच-गाने के लिए । मुख्य अतिथि कृपाशंकर का कहना है कि बांदा में जो ये आयोजन इस समय हो रहा है इससे बुंदेलखंड और खासकर बांदा के लोगों को बहुत लाभ मिलेगा और विभिन्न क्षेत्रों से आए हुए वैज्ञानिक बांदा के लोगों की शंका का समाधान करेंगे, पर क्या कुलपति महोदय ने कभी यह सोचा की इस सम्मिट का इस स्थान पर होने से मरीजो की सेहत पर कितना प्रभाव पड़ेगा ।