19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

2017 के पहले ही दिन हुई प्यार की हत्या

प्रेमी जोड़े ने जहर खाकर दी जान, शादी तय हो जाने के बाद लिया प्रेमी युगल ने फैसला.

3 min read
Google source verification

image

Abhishek Gupta

Jan 01, 2017

Love Suicide

Love Suicide

लखीमपुर-खीरी. नए साल का पहला दिन। नई उम्मीदों की शुरुआत का दिन। नए इरादों का फैसला लेने का दिन। हर कोई कुछ न कुछ करने का इरादा करता है। मगर हर कोई इतना खुशनसीब नहीं होता। कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी जिंदगी पहले दिन सूरज निकलने के पहले ही खत्म हो जाती है। निघासन कोतवाली क्षेत्र में एक प्रेमी जोड़ा अपनों के दिए घाव का शिकार हो गया। एक-दूसरे से बिछड़ जाना उन्हें मंजूर नहीं था इसलिए साथ मरने का इरादा कर लिया। साल की पहली सुबह ही उन्होंने जहर खाकर जान दे दी।

जानकारी के अनुसार, कोेतवाली निघासन क्षेत्र के ग्राम झौव्वापुरवा निवासी सुरेंद्र लाल (22) के बेटे संतोष कुमार का प्रेम प्रसंग गांव के ही स्व0 जगनू की बेटी सुमित्रा (20) के साथ चल रहा था। बताया जाता है कि उनका प्यार करीब दो साल से परवान चढ़ रहा था। एक ही बिरादरी के होने के बावजूद दोनों के परिवार राजी नहीं थे। छह महीने पहले दोनों फरार हो गए। बात जब गांव में फैली तो ग्रामीणों ने दोनों को खोजा। गांव लाने पर दोनों को समझाया-बुझाया गया। ग्रामीणों ने उनकी शादी कराने का आश्वासन देकर दोनों को घर भेज दिया। बीती रात सुमित्रा अपनी मां रामजती के साथ बंगले में सोई थी। सुबह करीब चार बजे सुमित्रा की हालत बिगड़ी। पता चलने पर वह गांव में ही इलाज करने वाले बंगाली डाक्टर को बुला लाई। उसकी हालत देख डाक्टर बंगाली ने जहर खाने की बात कही। तब सुमित्रा ने खुद के व प्रेमी सुरेंद्र के जहर खा लेने की जानकारी दी। कुछ देर बाद सुमित्रा की मौत हो गई जबकि प्रेमी सुरेंद्र को सीएचसी निघासन में भर्ती कराया गया। वहां प्रेमी ने भी दम तोड़ दिया। मौके पर पहुंचे कोतवाल दिनेश चंद्र मिश्र ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

मैं बचूंगी नहीं सुरेंद्र को बचा लो
डा. बंगाली ने बताया कि जब वह सुमित्रा के घर पहुंचा और उसकी हालत देखी तो उसे पता चल गया कि लड़की ने सल्फाज खाई है। उसने सुमित्रा से कहा कि उसने जहर खाया है। गंभीर हालत के बावजूद सुमित्रा ने कहा कि उसने ही नहीं उसके प्रेमी सुरेंद्र ने भी जहर खाया है। अब वह तो नहीं बचेगी। यदि सुरेंद्र को बचा सको तो बचा लो। उसकी जानकारी पर ही डाक्टर बंगाली ने सुरेंद्र के घर पहुंचकर उसके परिजनों को जानकारी दी। तब परिजन सुरेंद्र को लेकर सीएचसी पहुंचे लेकिन उसकी जान नहीं बचा पाये।

परिवारीजनों का धोखा बना मौत की वजह
जब प्रेमी युगल गांव से भाग गए थे तो ग्रामीणों ने उन्हें किसी तरह खोज निकाला था। एक ही बिरादरी के होने की वजह से उनकी शादी कराने का आश्वासन भी दिया था। मगर गांव के ही कुछ रिश्तेदार अलग ही बिसात बिछा रहे थे। वह लड़की की शादी जान-पहचाने में कराने की सोच रहे थे। शनिवार की रात फूलबेहड़ थाना क्षेत्र के किसी गांव के कुछ लोग लड़की के घर आए थे। उन्होंने न केवल लड़की को पसंद किया था बल्कि पूस महीने में शादी की तारीख भी निश्चित कर दी थी। यह पता चलने पर लड़की रात के करीब डेढ़-दो बजे लड़के से मिलने पड़ोस स्थित गन्ने के खेत में पहुंची। उसने परिवार द्वारा शादी तय करने की जानकारी दी। जिसके बाद दोनों ने खुदकुशी का इरादा कर लिया।

रात दस बजे ही दे दिया था खुदकुशी का संकेत
लखीमपुर-खीरी। भले ही सुमित्रा और सुरेंद्र ने सुबह चार बजे अपनी जिंदगी समाप्त की हो लेकिन खुदकुशी का संकेत सुमित्रा ने रात दस बजे ही दे दिया था। सुमित्रा कुछ दिनों से पैसे जोड़ रही थी। रात दस बजे अचानक उसने सारे रुपए निकाले और अपने भतीजों व भतीजियों में बांटने लगी। बकौल मां रामजती जब बेटी से पूछा कि इतनी रात में रुपए क्यों बांट रही हो। तो उसने कहा कि मां कल से तुम अपनी केवल दो ही बेटी होना समझना। इसके बाद वह अपनी मां के साथ बंगले में लेट गई।

पहले भागने का था इरादा
सुरेंद्र के घर तलाशी लेेने पर एक बैग मिला। इसमें सुमित्रा का आधार कार्ड, वोटर कार्ड, एटीएम कार्ड, अंक पत्र और कपड़े आदि मिले थे। कयास लगाया जा रहा है कि मरने से पहले दोनों का इरादा एक बार फिर भाग जाने का था। लेकिन दोनों के बीच क्या बातचीत हुई और उन्होंने फिर मरने का इरादा क्यों किया यह किसी को भी समझ नहीं आ रहा।

एक सी है दोनों परिवार की स्थिति
लखीमपुर-खीरी। दोनों परिवारों की स्थिति देखी जाए तो बराबर ही है। सुमित्रा और सुरेंद्र दोनों ही एक ही बिरादरी व दलित वर्ग के हैं। सुरेंद्र के माता-पिता के अलावा पांच भाई और तीन बहनें हैं। इसी प्रकार सुमित्रा की मां के अलावा उसके भी पांच भाई और तीन बहनें हैं। छह साल पहले लड़की के पिता का देहांत हो चुका है। दो बहनों की परिवार ने जैसे-तैसे शादी कर दी थी। अब केवल सुमित्रा की ही शादी होनी बची थी।