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भारत में यातायात प्रदूषण से साढ़े तीन लाख बच्चे प्रभावित, हुए अस्थमा के शिकार

हाल ही में एक स्टडी में सामने आया कि यातायात प्रदूषण से साढ़े तीन लाख बच्चे अस्थमा से प्रभावित हैं

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भारत में यातायात प्रदूषण से साढ़े तीन लाख बच्चे प्रभावित, हुए अस्थमा के शिकार

लखीमपुर खीरी. प्रदूषण कितना जानलेवा होता है ये बात सभी जानते हैं। हाल ही में एक स्टडी में सामने आया कि यातायात प्रदूषण से साढ़े तीन लाख बच्चे अस्थमा से प्रभावित हैं। ये आंकड़ा केवल भारत का है। अमेरिका स्थित जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक भारत में आबादी ज्यादा है। इसलिए वहां के बच्चों का प्रदूषण से इतनी बड़ी संख्या में प्रभावित होगा संभावित है। लांसेट जर्नल ने दुनियाभर के 125 प्रमुख शहरों का विश्लेषण कर यह जानकारी दी।

साढ़े तीन लाख की संख्या में बच्चों के अस्थमा से प्रभावित होने के मामले में भारत चीन के बाद प्रभावित होने वाला दूसरा राज्य है। चीन में 7 लाख 60 हजार बच्चे अस्थमा पीड़ित हैं। इसके अलावा यहां नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) की मात्रा सबसे अधिक (तीसरे स्थान पर) है। इस ऑक्साइड की मात्रा ही यातायात प्रदूषण की ओर इशारा करती है।

दुनियाभर की रिपोर्ट के आंकड़े

अमेरिका की जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक अमेरिका में 2,40,000, इंडोनेशिया में 1,60,000 और ब्राजील में 1,40,000 बच्चे इससे प्रभावित हैं। यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर सुसन सी. अनेनबर्ग ने बताया कि हर साल प्रति एक लाख बच्चों में यातायात जनित अस्थमा के 170 नए मामले सामने आते हैं। इसीतरह बचपन में होने वाले अस्थमा में तेरह फीसद मामले हर साल सामने आते हैं। दक्षिण कोरिया में 31 फीसद मामले यातायात से होने वाले वायु प्रदूषण से दमा का हैैै।