
6 दिसंबर 2022 को लखीमपुर की एडीजे कोर्ट ने अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा समेत सभी 14 आरोपियों पर आरोप तय कर दिए थे।
मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा ने जमानत के लिए याचिका फाइल की थी। इसी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की पीठ ने ट्रायल कोर्ट की रिपोर्ट का रेफरेंस दिया और कहा कि "सेशन कोर्ट कहता है कि मुकदमें को पूरा होने में 5 साल लगेंगे। एडिशनल सेशन जज की रिपोर्ट कहती है कि इस केस में कुल 208 गवाह, 171 डॉक्यूमेंट और 27 FSL रिपोर्ट है।"
इससे पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहले इस मामले में निचली अदालत में आरोप तय हो जाने दिया जाए, उसके बाद जमानत याचिका पर सुनवाई होगी। जिसके बाद 6 दिसंबर 2022 को लखीमपुर की एडीजे कोर्ट ने अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा समेत सभी 14 आरोपियों पर आरोप तय कर दिए थे।
सुनवाई की लास्ट डेट पर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से केस का स्टेटस मांगा था। तब पीठ ने कहा कि इस मामले में दो मुकदमें हैं। कोर्ट ने यह भी जाना कि क्या दूसरे मामले में भी आशीष मिश्रा आरोपी हैं या नहीं।
जैसे ही पीठ ने दूसरे मामले की स्टेटस रिपोर्ट मांगी, मामले में अपीलकर्ताओं की ओर से पेश एडवोकेट प्रशांत भूषण ने बेंच से रिक्वेस्ट किया कि महत्वपूर्ण गवाहों को दिन-प्रतिदिन यानी हर रोज की सुनवाई के बेस पर सुना जा सकता है।
बेंच ने पॉइंट करते हुए रिपोर्ट में कहा था कि जिस दिन उसकी जांच की जानी थी, महत्वपूर्ण गवाहों में से एक को बुखार हो गया था और कहा कि इस तरह की वास्तविक मुसीबतें पैदा होती रहेंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "यदि आप इसे और तेज करते हैं तो इस अदालत को अन्य सभी केसेस की कीमत पर इस मुकदमा को चलाना होगा। इसलिए हमने ट्रायल कोर्ट से पूछा।
प्रशांत भूषण ने कहा कि यह एक ऐसा मामला है जिसमें सुप्रीम कोर्ट के कहने पर एक विशेष जांच दल यानी SIT को बनाया गया है। भूषण ने यह बात पॉइंट करते हुए कहा कि मिश्रा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे हैं। गवाहों पर हमला किया गया था, उन्होंने मुकदमें की डेली सुनवाई की मांग को फिर से दोहराई।
मिश्रा की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने इस आरोप को काउंटर करते हुए इसे "पूरी तरह से गलत" करार दिया।
भूषण ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की आरोपियों से मिलीभगत है, इसलिए SIT को बनाया गया। उत्तर प्रदेश की एडिशनल एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद ने इसका खंडन किया और कहा, "यह हमारी चार्जशीट है"।
किसानों के हाथों लिंचिंग से रिलेटेड सेकेंड FIR का जिक्र करते हुए बेंच ने AAG से पूछा, “क्या आप उस मामले की औपचारिक स्थिति रिपोर्ट भी ला सकते हैं?" लिंचिंग में आशीष के काफिले की कार के ड्राइवर समेत 2 और लोगों की मौत हो गयी थी।
कोर्ट ने कहा कि वह जानना चाहते हैं कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है वो दूसरे केस में भी आरोपी हैं या नहीं। “हम दूसरी FIR में अभियुक्तों का डिटेल जानना चाहते हैं। कि कितने गिरफ्तार हुए, क्या स्थिति है, सब कुछ। हम जानना चाहते हैं कि उनमें से कितने अभी अरेस्ट हैं?”
दूसरी FIR पर मुकुल रोहतगी ने कहा, 'यह हमारा मामला है। यह भीड़ की हिंसा का मामला है कि हमारी जीप पर हमला किया गया।”
पीठ ने मामले को 19 जनवरी को सुनवाई के लिए टाल दिया है। साथ ही AAG को यह बताने का निर्देश दिया कि क्या दूसरी FIR के आरोपी अभी भी हिरासत में हैं या नहीं।
जीप से कुचल कर उतार दिया था मौत के घाट, जानिए क्या था पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के तिकुनिया थाना क्षेत्र में 3 अक्टूबर 2021 को हिंसा हुई थी। आरोप है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा ने जीप से प्रदर्शनकारी किसानों को कुचल दिया था। इस दुर्घटना में चार लोगों की मौत हो गई थी। मामले में हिंसा भड़कने के बाद 8 लोगों की जान चली गई थी।
सुनवाई में आशीष मिश्रा की ओर से मुकुल रोहतगी ने कहा था कि आशीष मिश्रा की अर्जी निचली अदालत ने खारिज कर दी है। उन पर आरोप तय कर दिए गए हैं। वो घटना के समय कार में नहीं था, फिर भी एक साल से ज्यादा समय से जेल में है। पहले हाईकोर्ट ने जमानत दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द कर फिर से मामले को हाईकोर्ट भेज दिया था।
Updated on:
11 Jan 2023 07:00 pm
Published on:
11 Jan 2023 06:54 pm
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