
महशिवरात्रि : पाली शिव मंदिर की शक्ति देख औरंगजेब भी हुआ नतमस्तक, यहां के चमत्कारी जल से दूर होती हैं कई बीमारियां
ललितपुर. बुंदेलखंड का पाली शिव मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। इस मंदिर पर भारत से ही नहीं विदेशों से पर्यटक भगवान शिव के दर्शन करने आते है। यहां एक चमत्कारी झरना है जिसमें स्नान करने या उसका पानी पीने से शरीर की कई गंभीर बीमारियां ठीक हो जाती है। महाशिवरात्रि पर इस पावन मंदिर में कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। जिसमें भगवान शिव की बारात निकाली जाती है। और फिर प्रसाद बंटा जाता है।
अर्धनारीश्वर भगवान शिव की त्रिमूर्ति 2000 वर्ष पुरानी :- जनपद की तहसील पाली के स्थानीय कस्बे से 5 किलोमीटर दूर विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की गोद में आध्यात्मिक प्राकृतिक पर्यटन तीर्थ स्थल नीलकंठेश्वर धाम बसा हुआ है। नीलकंठेश्वर धाम की महिमा निराली है। यह तीर्थस्थल लगभग 2000 वर्ष पुराना है। इसका अपना एक विशेष महत्त्व है। यह शिव मंदिर चंदेलकालीन है, इस मंदिर में भगवान शिव की जो त्रिमूर्ति प्रतिमा बनी हुई है ऐसी प्रतिमा पूरे भारतवर्ष में कहीं नहीं है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर श्रद्धालु अगाध श्रद्धा और भक्ति भाव से अर्धनारीश्वर भगवान शिव की त्रिमूर्ति पर बेल पत्र, फल, फूल, दूध आदि चढ़ाकर भगवान की आरती उतारकर मुरादें मांगते हैं। और भगवान शिव उनकी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं।
मुगल शासक औरंगजेब भी हो गया नतमस्तक :- स्थानीय लोग बताते हैं कि यह प्रतिमा यहां पर अपने आप प्रकट हुई थी। इस प्रतिमा का चमत्कार देखकर मुगल शासक औरंगजेब जो मंदिर तोड़ने के लिए यहां आया था, यहां से नतमस्तक होकर गया था। यहां के बुजुर्ग बताते है कि इस मंदिर के बारे में वर्णित है कि, जब औरंगजेब ने हिंदू मंदिरों को अपना निशाना बनाया और उन्हें तहस-नहस करने की ठानी। तब वह मंदिरों को तोड़ता हुआ इस नीलकंठेश्वर धाम पर आया और यहां चमत्कारिक शिव की प्रतिमा पर उसे खंडित करने के उद्देश्य तलवार से प्रहार किया। तो शिव प्रतिमा से पहले दूध की धार फिर गंगाजल की धारा निकली। और उसके बाद ओम नमः शिवाय के साथ साथ शंख झालर घंटों की आवाजें आने लगी। यह चमत्कार देखकर औरंगजेब भगवान के आगे नतमस्तक होकर लौट गया।
सुरक्षा की चौकस व्यवस्था :- सड़क से मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। मंदिर जंगल के रास्ते में पड़ता है इसीलिए यहां सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने पुलिस चौकी बनाई है। जिसमें 3 पुलिसकर्मी तैनात रहते है।
झरने का पानी है चमत्कारी :- श्रद्धालुओं की ऐसी आस्था है कि मंदिर के नीचे बने झरने में नहाने से शरीर की चर्म रोग दूर हो जाती है तो वहीं इस झरने का पानी पीने से शरीर के अंदर की कई बीमारियां भी ठीक हो जाती है। झरने का पानी पीने वालों को कभी पेट की बीमारियों से ग्रसित नहीं होना पड़ता। यहां पूरे भारतवर्ष से हजारों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं। और अपने वाहनों में झरने का पानी भरकर ले जाते हैं जो गंगा जल की तरह काम करता है।
सबकी पूरी होती है मनोकामना :- इस मंदिर में भारत के कोने-कोने से श्रद्धालु आते है। इतना ही नहीं यहां विदेशी पर्यटक भी आते हैं जो अपनी मनोकामना कहकर जाते हैं और जब पूर्ण हो जाती है तो वह यहां पर भंडारा कराने भी आते हैं।
Updated on:
11 Mar 2021 01:33 pm
Published on:
11 Mar 2021 01:32 pm

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