
दो हजार निजी कंपनियों को लग सकता है ILFS में निवेश से झटका
नई दिल्ली। इनफ्रस्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज ( आईएलएफएस ) और उसकी सहायक कंपनियों के बांडों में निवेश का खमियाजा म्यूचुअल फंड ( Mutual Fund ) और बीमा कंपनियों के बाद अब निजी क्षेत्र की करीब 2,000 कंपनियों को उठाना पड़ सकता है। इनमें इन्फोसिस, टाटा पावर, ल्यूपिन जैसी दिग्गज कंपनियां शुमार हैं।
इन कंपनियों नेअपने निजी भविष्य निधि और पेंशन फंड का निवेश आइएलएंडएफएस समूह की फर्मों के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचरों में किया है। इसपर उन्हें करीब 9,000 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इतना ही नहीं कर्मचारी भविष्य निधि योजना ( इपीएफएस ) 1952 के दिशा-निर्देशों के अनुसार इन कंपनियों को इस घाटे का वहन करना होगा।
वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ( ईपीएफओ ) से भी आइएलएंडएफएस तथा इस तरह की जोखिम वाली फर्मों में निवेश की जानकारी मांगी है क्योंकि इसकी वजह से इस साल के लिए घोषित ब्याज दर का भुगतान करने में ईपीएफओ को मुश्किल हो सकती है। आइएलएंडएफएस, आइफिन और आइटीएनएल 'रेड' श्रेणी में हैं, जिसका मतलब है कि इन कंपनियों के पास नकदी नहीं है।
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Published on:
13 May 2019 07:55 pm
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