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रेमंड ग्रुप के गौतम सिंघानिया बोले, परिवार से बड़ी कंपनी

 गौतम सिंघानिया ने कहा कि कंपनी परिवार से बड़ा होता है, इसलिए शेयर होल्डरों के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया।

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Gautam Singhania

नई दिल्ली। संपत्ति विवाद को लेकर रेमंड के चेयरमैन गौतम सिंघानिया ने अपने पिता विजयपत सिंधानिया के आरोप को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि वह जो कर रहे हैं कंपनी को बेहतर बनाने के लिए कर रहे हैं। कंपनी परिवार से बड़ा होता है, इसलिए शेयर होल्डरों के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया। एक बेटे के तौर पर मैं पिछले लंबे समय से पिता और परिवार वालों के साथ मिलकर विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहा हूं।

गौरतलब है कि उनके पिता ने कहा था कि उन्होंने 1,000 करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य के बराबर कंपनी का 37 फीसदी हिस्सा बेटे को सौंपकर बहुत बड़ी गलती की। गौतम सिंघानिया ने अपने बयान में कहा कि मैंने 35 साल कंपनी को सफलतापूर्वक चलाया और दिन में 16 घंटे काम किया। उन्होंने कहा अगर वह यह हिस्सा किसी और को देते तो 35 हजार कर्मचारियों का क्या होता जो कंपनी में इतने सालों से काम कर रहे हैं। वे मानते हैं कि रेमंड कंपनी के चेयरमैन और विजयपत के पुत्र के बतौर उनकी जिम्मेदारियां और भूमिकाएं अलग-अलग हैं। उनके मुताबिक शेयरधारकों के हित परिवार के हित से बड़ा हैं।


क्या है पूरा मामला

पूरा विवाद जेके हाउस को लेकर है। यह बिल्डिंग 1960 में बनी थी और तब 14 मंजिला थी। बाद में बिल्डिंग के 4 ड्यूप्लेक्स रेमंड की सब्सिडरी पश्मीना होल्डिंग्स को दिए गए। उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि सिंघानिया ने कंपनी में अपने सारे शेयर फरवरी 2015 में बेटे के हिस्से में दे दिए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, इन शेयर्स की कीमत करीब 1000 करोड़ रुपए थी।


90 साल पुरानी कंपनी

दुनियाभर में सूटिंग और शर्टिंग के लिए मशहूर रेमंड की नींव 1925 में रखी गई थी। इसका पहला रिटेल शोरूम 1958 में मुंबई में खुला था। विजयपत ने कंपनी की कमान 1980 में संभाली और उसके बाद कंपनी को लगातार बुलंदियों पर ले गए।


1925 में रखी थी नींव

रेमंड कंपनी की नींव १९२५ में रखी गई। पारिवारिक बिजनेस में गौतम पहले से ही रूचि दिखाते थे। लेकिन साल २०१५ में कंपनी की पूरी कमान गौतम को दे दी गई।

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