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बाथरूम में ‘साइलेंट किलर’ बन गया गीजर: न आवाज, न दर्द… ऐसे चली गई UP के उत्कर्ष की जान, आप न करें ये भूल

Gas Geyser Safety Tips: बाथरूम में 'साइलेंट किलर' ने ली छात्र की जान। जानिए कैसे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनती है जानलेवा और बचाव के जरूरी टिप्स।b

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भारत

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Rahul Yadav

Jan 03, 2026

Gas Geyser Safety Tips

Gas Geyser Safety Tips (Image: Gemini)

Gas Geyser Safety Tips: सर्दियों में गर्म पानी से नहाना किसे पसंद नहीं। बाथरूम में गीजर ऑन किया, कुछ मिनट इंतजार किया और आराम से नहा लिया। लेकिन कई बार यही रोजमर्रा की आदत इतनी खतरनाक साबित हो सकती है कि इंसान को संभलने तक का मौका नहीं मिलता।

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से सामने आई एक घटना ने यही डरावनी सच्चाई दिखा दी है। यहां बाथरूम में लगे गैस गीजर की वजह से 18 साल के एक छात्र की जान चली गई। न कोई शोर हुआ, न चीख-पुकार… घरवालों को कुछ समझ में आता, उससे पहले सब कुछ खत्म हो चुका था।

जब बाथरूम की खामोशी डर बन गई

मामला शाहजहांपुर की राधा विहार कॉलोनी का है। दोपहर का वक्त था। 12वीं में पढ़ने वाला उत्कर्ष त्रिवेदी नहाने के लिए बाथरूम में गया। घर में सब कुछ सामान्य था। माता-पिता को लगा कि थोड़ी देर में बेटा बाहर आ जाएगा।

लेकिन समय गुजरता गया। पानी की आवाज लगातार आती रही, फिर अचानक सब शांत हो गया। काफी देर तक जब दरवाजा नहीं खुला और अंदर से कोई जवाब नहीं मिला, तो घरवालों की चिंता बढ़ने लगी। कई बार आवाज दी गई, दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन अंदर से कोई हरकत नहीं हुई।

आखिरकार दरवाजा तोड़ा गया। अंदर का नजारा देख परिवार के होश उड़ गए। उत्कर्ष जमीन पर बेहोशी की हालत में पड़ा था और गीजर चालू था। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में दम घुटने की बात सामने आई।

आखिर हुआ क्या था अंदर?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक स्वस्थ, पढ़ा-लिखा 18 साल का लड़का मदद के लिए आवाज क्यों नहीं लगा सका। इसका जवाब है कार्बन मोनोऑक्साइड गैस।

गैस गीजर जब बंद और कम हवा वाली जगह में चलता है, तो वह ऑक्सीजन को तेजी से खत्म करता है। बदले में एक जहरीली गैस निकलती है, जिसे कार्बन मोनोऑक्साइड कहते हैं। यह गैस न दिखती है, न इसकी कोई गंध होती है। इंसान को पता ही नहीं चलता कि वह इसे सांस के साथ अंदर ले रहा है।

धीरे-धीरे यह गैस शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई रोक देती है। दिमाग सुन्न होने लगता है, शरीर जवाब देने लगता है और इंसान बेहोश हो जाता है। कई मामलों में तो चीखने या बाहर निकलने का मौका भी नहीं मिल पाता। उत्कर्ष के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, ऐसा डॉक्टरों का कहना है।

अधूरा रह गया एक सपना

उत्कर्ष सिर्फ एक छात्र नहीं था। वह पढ़ाई में तेज था और अपने स्कूल के होनहार बच्चों में गिना जाता था। उसकी मां सरकारी शिक्षिका हैं। परिवार को उससे बड़ी उम्मीदें थीं। वह NDA के जरिए नेवी अफसर बनना चाहता था।

स्कूल के लोगों के मुताबिक, कुछ दिन पहले ही वह अपनी 10वीं की मार्कशीट लेकर गया था ताकि आगे की तैयारी कर सके। लेकिन एक छोटी सी लापरवाही ने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी।

अगर आपके घर में भी गैस गीजर है, तो सावधान

यह घटना हर उस घर के लिए चेतावनी है, जहां गैस गीजर इस्तेमाल होता है। गीजर खराब चीज नहीं है, लेकिन गलत तरीके से इस्तेमाल करना जानलेवा हो सकता है। कुछ जरूरी बातें हमेशा याद रखें

  • हवा का रास्ता जरूरी है: बाथरूम में खिड़की या रोशनदान नहीं है, तो वहां गैस गीजर न लगाएं।
  • एग्जॉस्ट फैन चालू रखें: नहाते वक्त एग्जॉस्ट फैन बंद न करें। यह गैस को बाहर निकालने में मदद करता है।
  • गीजर लगातार न चलाएं: पहले बाल्टी में पानी भर लें, फिर गीजर बंद करके नहाएं।
  • सबसे सुरक्षित तरीका: गैस गीजर को बाथरूम के बाहर लगवाएं और सिर्फ गर्म पानी का पाइप अंदर लाएं।

एक छोटी सावधानी, बड़ा बचाव

गीजर से जुड़े हादसे अक्सर बिना किसी चेतावनी के होते हैं। न आवाज आती है, न दर्द होता है। इसलिए सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है। उत्कर्ष की कहानी हमें यही सिखाती है कि घर में इस्तेमाल होने वाली चीजें भी तब खतरनाक बन जाती हैं, जब हम उनकी सही सावधानियां भूल जाते हैं।