
Artificial Intelligence(Image-Freepik)
Artificial Intelligence: वैज्ञानिकों ने हाल ही में ऐसी नई तकनीक विकसित की है जिससे Artificial Intelligence (AI) सिस्टम को चलाने के लिए आवश्यक कंप्यूटर मेमोरी को लगभग 50 गुना तक कम किया जा सकता है। इस टेक्नोलॉजी की खास बात यह है कि मेमोरी की जरूरत कम होने के बावजूद AI की कार्यक्षमता और उसकी सटीकता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह खोज अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के शोधकर्ताओं ने की है और इस तकनीक को उन्होंने “अटेंशन मैचिंग” नाम दिया है।
आज के समय में ChatGPT, Gemini और Grok जैसे उन्नत AI सिस्टम को चलाने के लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग पावर, बड़ी मात्रा में मेमोरी और महंगे सर्वरों की आवश्यकता होती है। इसके कारण इन तकनीकों को विकसित करने और चलाने की लागत काफी बढ़ जाती है। कई कंपनियों और संस्थानों के लिए इतनी बड़ी तकनीकी व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है।
नई “अटेंशन मैचिंग” तकनीक इस समस्या का समाधान देती है। इसके माध्यम से बड़े और जटिल डेटा को बहुत कम मेमोरी में स्टोर और प्रोसेस किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, जिस डेटा को पहले लगभग 1 जीबी मेमोरी की आवश्यकता होती थी, उसे अब केवल लगभग 20 एमबी मेमोरी में सुरक्षित रूप से स्टोर किया जा सकता है। इसका मतलब है कि AI सिस्टम पहले की तुलना में कम संसाधनों के साथ भी उतनी ही प्रभावी तरीके से काम कर सकेंगे।
इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ मेडिकल और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। अस्पतालों में मरीजों के कई वर्षों के मेडिकल रिकॉर्ड होते हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना और तेजी से प्रोसेस करना जरूरी होता है। वहीं बैंकों के पास भी बड़े पैमाने पर वित्तीय डेटा होता है। नई तकनीक की मदद से इन क्षेत्रों में डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की लागत कम होगी और काम की गति भी बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में AI को अधिक सुलभ और किफायती बना सकती है, जिससे विभिन्न उद्योगों में इसके उपयोग का दायरा और भी तेजी से बढ़ेगा।
Published on:
11 Mar 2026 05:35 am
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