
Healthy Sugar Alternatives|फोटो सोर्स -Freepik
Sugar Replacement: ज्यादा चीनी खाना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है, लेकिन मीठा छोड़ना जरूरी नहीं है। कुछ देसी और नेचुरल विकल्प ऐसे हैं, जिन्हें आप चाय, कॉफी या दूध में मिलाकर स्वाद भी बनाए रख सकते हैं और सेहत का भी ध्यान रख सकते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको एक ऐसे सुपरफूड के बारे में बताएंगे, जो चीनी का हेल्दी और सुरक्षित विकल्प है और शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है।
बाजार में मिलने वाली चमचमाती सफेद चीनी को 'स्लो पॉइजन' कहा जाता है क्योंकि उसे साफ करने में कई तरह के केमिकल्स और प्रोसेसिंग का इस्तेमाल होता है। वहीं दूसरी तरफ, देसी खांड गन्ने के रस का सबसे शुद्ध और पवित्र रूप है।इसे बनाने का तरीका बेहद पारंपरिक है। इसमें न तो कोई मशीन वाली ब्लीचिंग होती है और न ही खतरनाक रसायन मिलाए जाते हैं। यही वजह है कि इसका रंग एकदम सफेद न होकर हल्का भूरा या मटमैला होता है। जब आप इसे चाय में डालते हैं, तो चीनी वाली तीखी मिठास की जगह एक सौंधी-सौंधी गुड़ जैसी खुशबू और नेचुरल स्वाद आता है।
आजकल हर दूसरा शख्स फिटनेस को लेकर जागरूक हो गया है। लोग समझ रहे हैं कि रिफाइंड शुगर और आर्टिफिशियल स्वीटनर (शुगर फ्री गोलियां) लंबे समय में शरीर को धोखा देते हैं। ऐसे में देसी खांड एक ऐसा 'स्मार्ट स्विच' है, जो आपकी लाइफस्टाइल को बिना डिस्टर्ब किए आपको हेल्दी बनाता है।
अक्सर आपने महसूस किया होगा कि चीनी वाली गाढ़ी चाय पीने के बाद पेट फूलने लगता है या सीने में जलन (एसिडिटी) होने लगती है। देसी खांड तासीर में हल्की होती है। यह पचने में आसान है, इसलिए चाय पीने के बाद भारीपन नहीं लगता और पाचन तंत्र भी ठीक काम करता है।हड्डि
शायद आपको यकीन न हो, लेकिन देसी खांड में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे तत्व कुदरती रूप में मौजूद होते हैं। अगर जोड़ों में दर्द रहता है या हड्डियां कमजोर महसूस होती हैं, तो इसका सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है।खून की कमी
महिलाओं में अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी की शिकायत देखी जाती है। चूंकि खांड गन्ने के रस का शुद्ध रूप है, इसलिए इसमें आयरन (Iron) भरपूर मात्रा में होता है। यह शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को सुधारने में मदद कर सकती है।बदलते मौसम में
देसी खांड में मौजूद प्राकृतिक मिनरल्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में सहायक हो सकते हैं। मौसम बदलने पर सर्दी-जुकाम या थकान जैसी दिक्कतों से बचाव में इसका हल्का-फुल्का योगदान माना जाता है।
Published on:
15 Dec 2025 03:14 pm

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