
How thyroid patients can safely eat millet|फोटो सोर्स- Chatgpt
Thyroid Me Bajra Khane Ke Fayde: बाजरा को सेहत के लिए सुपरफूड माना जाता है, लेकिन थायरॉइड के मरीजों के लिए यही बाजरा सवाल भी बन जाता है। कहीं यह हार्मोन असंतुलन तो नहीं बढ़ाता? क्या इसे रोज खाना सुरक्षित है या सीमित मात्रा में ही फायदा देता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, थायरॉइड में बाजरा पूरी तरह मना नहीं है, बस इसे सही समय, सही मात्रा और सही तरीके से खाना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं कि थायरॉइड के मरीजों के लिए बाजरा कितना सुरक्षित है और कब व कितना खाना चाहिए।
थायरॉइड एक हार्मोन से जुड़ी समस्या है, जिसमें शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। हाइपोथायरॉइड के मरीजों में थायरॉइड हार्मोन कम बनता है। बाजरे में गोइट्रोजन तत्व पाया जाता है, जो आयोडीन के अवशोषण में रुकावट डाल सकता है। आयोडीन थायरॉइड हार्मोन के लिए जरूरी होता है, इसलिए जरूरत से ज्यादा बाजरा खाने पर समस्या बढ़ सकती है।
हां, लेकिन सीमित मात्रा में। बाजरा पूरी तरह से नुकसानदायक नहीं है। अगर इसे सही तरीके से और संतुलन में खाया जाए, तो यह शरीर को फाइबर, आयरन और एनर्जी देने में मदद करता है। समस्या तब होती है जब मरीज इसे रोजाना या बहुत अधिक मात्रा में खाने लगते हैं।
थायरॉइड के मरीजों को हमेशा बाजरा अच्छी तरह पकाकर खाना चाहिए। कच्चा या अधपका बाजरा गोइट्रोजन प्रभाव को बढ़ा सकता है। बाजरे की रोटी, दलिया या खिचड़ी बेहतर विकल्प हैं। पकाने से इसके हानिकारक तत्व काफी हद तक कम हो जाते हैं और पाचन भी आसान होता है।
हाइपोथायरॉइड के मरीजों के लिए हफ्ते में 1 से 2 बार बाजरा खाना सुरक्षित माना जाता है। एक समय में 1–2 छोटी रोटी या एक कटोरी बाजरे की खिचड़ी पर्याप्त होती है। इसे रोजाना खाने से बचना चाहिए। साथ ही डाइट में आयोडीन युक्त नमक, फल, सब्जियां और प्रोटीन जरूर शामिल करें।
बाजरा खाने का सबसे अच्छा समय दोपहर का भोजन होता है। रात में बाजरा खाने से गैस, भारीपन और पाचन से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं, खासकर उन लोगों में जिनका मेटाबॉलिज्म धीमा होता है।
अगर आपका थायरॉइड लेवल ज्यादा बिगड़ा हुआ है, वजन तेजी से बढ़ रहा है या दवाइयों की डोज हाल ही में बदली गई है, तो बाजरा खाने से पहले डॉक्टर या डाइट एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर रहता है।
Published on:
24 Jan 2026 01:56 pm
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