
केशव तैयार कर रहे हैं सांसदों का रिपोर्ट कार्ड, इनके टिकट कटना तय?
लखनऊ. लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी है। यूपी से भाजपा ने 2014 में सूबे की 80 सीटों में से 73 सीटों पर जीत दर्ज किया था। इसमें उसके सहयोगी दल भी शामिल थे। भाजपा 2014 की तरह इस बार भी अपना परचम लहराना चाहती है। पार्टी की नजरें हर सीट पर है। वह उन सांसदों को टिकट देने के मूड में नहीं है जिनका परफार्मेंस अच्छा नहीं है। सूत्रों की मानें तो यूपी में मौजूदा २५ सांसदों के टिकट कटने तय माने जा रहे हैं। यूपी के सांसदों के रिपोर्ट कार्ड तैयार करने की जिम्मेदारी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को सौंपी गई है।
मौर्य को नई जिम्मेदारी मिलने के बाद अब उन 25 सांसदों के कामकाज के बारे में नए सिरे से समीक्षा की जाएगी। इन सांसदों के टिकट कटने के बारे में भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने रिपोर्ट तैयार की थी। .प्रदेश नेतृत्व ने पार्टी के कार्यक्रमों में असहयोग करने वाले व पिछले साढ़े चार साल के कार्यकाल में जनता की अनदेखी करने वाले 25 मौजूदा सांसदों के भाजपा नेतृत्व अगले लोकसभा चुनावों में टिकट काटने की रिपोर्ट तैयार की थी। ऐसे ही सांसद दोबारा टिकट न मिलने के अंदेशे में पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के पास अपना पक्ष रखने गए थे।
प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक हालातों को देखते हुए केशव प्रसाद मौर्य हर सांसद की जातीय, क्षेत्रीय सक्रियता, समीकरणों को देखकर रिपोर्ट तैयार करने में जुटे हैं। उनकी नई जिम्मेदारियों में टिकट कटने लायक मौजूदा सांसद के स्थान पर पार्टी या विपक्षी दलों में किसी नए चेहरे को तलाशना भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश नेतृत्व की ओर से 25 सांसदों के टिकट कटने की रिपोर्ट विधानसभा व लोकसभा उपचुनावों के पहले तैयार की गई थी। इन सभी चुनावों में भाजपा हारी थी।
इस जीत से उत्साहित सपा-बसपा की ओर से चुनाव में मिलकर भाजपा को हराने का दावा किया गया था। इसी के बाद केन्द्रीय नेतृत्व ने सभी सांसदों के बारे में अपनी राय बदलते हुए मौर्य को मौजूदा सांसदों के बारे में फिर से रिपोर्ट बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक हालातों और विपक्ष के प्रस्तावित महागठबंधन के मद्देनजर केशव यह भी देखेंगे कि यदि किसी सांसद का संगठन के कामकाज के ज्यादा लगाव न रहा हो, लेकिन क्षेत्र में उसकी लोकप्रियता बरकरार है। पार्टी ऐसे सांसद पर दोबारा दांव खेल सकती है। ऐसे सांसद जो संगठन के भी काम न आए और क्षेत्रीय जनता के बीच भी अपनी लोकप्रियता खो चुके हों, उनके टिकट तो कटना तय है।
माना जा रहा है कि इन सांसदों के स्थान पर कुछ कद्दावर मंत्रियों और सीनियर विधायकों को भी लोकसभा का चुनाव लड़ाया जा सकता है। पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व की नजर में करीब आधा दर्जन मंत्री और इतने ही विधायक लोकसभा चुनाव के मैदान में उतारे जा सकते हैं। किस सांसद का टिकट कटेगा यह तो केशव प्रसाद मौर्य के रिपोर्ट तैयार करने के बाद ही पता चलेगा।
Published on:
28 Oct 2018 03:01 pm
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