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लखनऊ. खाद्य की सुरक्षा, प्रदूषण से निपटने व लोगों को स्वस्थ्य जीवन देने के मकसद से गुरुवार को ज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) - भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय विषविज्ञान सम्मेलन (इन्टरनेशनल टॉक्सिकोलोजी कॉन्क्लेव) की शुरुआत हुई। सम्मेलन में प्रदूषण व स्वस्थ्य जीवन से जुड़े कई मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। अपने संबोधन में सीएसआईआर - इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च के निदेशक, प्रोफेसर आलोक धवन ने आईटीसी की उत्पत्ति का जिक्र करते हुए कहा कि अपनी पांच दशकों से अधिक की सेवा के दौरान, सीएसआईआर - आईआईटीआर ने उद्योग जगत की आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ-साथ समाज की सेवा करने में अथक प्रयास किया है।
इस कॉन्क्लेव का उद्घाटन करते हुए लखनऊ के बायोटेक पार्क के सीईओ प्रोफेसर प्रमोद टंडन ने बताया कि वर्तमान स्थितियों से निपटने के लिए, प्रदूषण को कम करने और उपचारात्मक उपायों के विकास में सीएसआईआर - आईआईटीआर की महत्वपूर्ण भूमिका है। आने वाली पीढ़ियों के लिए खाद्य सुरक्षा और सुरक्षित भोजन को उपलब्ध कराने के लिए अनुसंधान संचालित की पहल की जरूरत है।
कॉन्क्लेव का पहला दिन पहला सेशन "भविष्य के लिए खाद्य सुरक्षा" पर केंद्रित था। तो वहीं दिन के दूसरे सत्र में विषाक्तता को कम करने और मानव स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए डेटा और प्रौद्योगिकी उपकरणों का उपयोग करने की बारीकियों पर प्रकाश डाला गया। सीएसआईआर - सेंट्रल लेदर टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट, चेन्नई की ओर से डॉ. सुब्रमण्यन ने विषाक्तता की भविष्यवाणी के लिए मशीन लर्निंग स्ट्रेटेजी के फायदों पर प्रकाश डाला।
Published on:
05 Dec 2019 10:35 pm
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