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International Hygiene Day 2018 जहाँ चुनौतियाँ होतीं हैं वहां नई राहें भी निकलती हैं

इस लड़की के साथ हुई ऐसी घटना जिसमे उसने ना हारी हिम्मत , यह शहर की नहीं गांव की थी लड़की

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Ritesh Singh

लखनऊ, मासिक धर्म एक प्राकृतिक एवं सामान्य प्रक्रिया है जिसके साथ बहुत सारी भ्रांतियां एवं मिथक जुड़े हुए हैं जो युवा महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालते हैं। किशोरियों और महिलाओ को उन `विशेष’ दिनों में शारीरिक और मानसिक रूप से अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिसमें मिथक उनकी परेशानी को और बढ़ा देते हैं। उनके रोज़मर्रा के जीवन में तमाम तरह की पाबंदियां लग जाती हैं। अधिकांश लडकियाँ इस दौरान की जाने वाली रोक-टोक पर आपत्ति जताने का साहस नहीं कर पाती हैं। यदि कोई लड़की चर्चा करना भी चाहे तो उसे पारिवारिक और सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ता है।

इस लड़की के साथ हुई ऐसी घटना जिसमे उसने ना हारी हिम्मत , यह शहर की नहीं गांव की थी लड़की

निम्न वर्गीय समाज की उस किशोरी का चेहरा है जो गाँव की आधी किशोरी जनसँख्या का प्रतिनिधित्व करती हैं। वही 15 वर्षीय रेहाना ,रेहाना मौरा गाँव, काकोरी ब्लॉक, लखनऊ की निवासी हैं। स्कूल नहीं जाती, अपनी अम्मी के साथ घर के कामों में हाथ बटाती हैं। जब वी.एच.एन.डी के दौरान ए.एन.एम ने रेहाना को मासिक चक्र के बारे में बताया तो वह मात्र 10 वर्ष की थी।

उसने उनकी इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया ,उसे लगा इससे उसका क्या लेना देना हैं लेकिन एक वर्ष बाद जब उसे पहला मासिक चक्र शुरू हुआ तो उसकी अम्मी सलाह के लिए एएनएम बहन के पास ले गयीं जहां उसे इस दौरान साफ़-सफाई, खान-पान व स्वास्थ्य सम्बन्धी व्यवहार के साथ-साथ Sanitary Napkin के बारे में बताया, किन्तु आर्थिक तंगी के कारण रेहाना के लिए Sanitary Napkin खरीद पाना सम्भव नहीं था।

रेहाना ने नहीं हारी हिम्मत

रेहाना ने भी अपनी मुश्किलों से उभरने का रास्ता निकाल लिया। घर पर पड़े सूती कपड़ों को धो कर, धूप में सुखा कर, सिलकर Sanitary Napkin बनाया। इस तरह उसने Sanitary Napkin अपनी हम उम्र किशोरियों को भी दिया तथा सन्देश दिया कि उनके सामने चुनौतियां चाहे कितनी भी कठिन हो, पर उनका सामना मजबूती से किया जा सकता है।

मासिक धर्म के समय रखे साफ सफ़ाई

मासिक चक्र स्वच्छता प्रबंधन अथवा Maestroel Hygiene Management यह केवल Sanitary Napkin का वितरण एवं उसकी उसके बारे में प्रशिक्षण देना मात्र नहीं है बल्कि इसके अंतर्गत मासिक चक्र के विषय पर किशोरियों और महिलाओं को जागरूक करना, उस दौरान साफ़ सफाई का ध्यान रखना, सेनेटरी पैड या साफ़ कपडे का इस्तेमाल एवं सुरक्षित निस्तारण भी उतना ही आवश्यक है।

इन व्यवहारिक बातों का ध्यान रखने से प्रजनन के संक्रमण और बीमारियों से बचाव संभव है। इससे जुड़े भेदभाव व उसके शारीरिक और मानसिक दुष्प्रभावों को समझते हुए विश्व में पहली बार 28 मई 2014 को International Menstrual Hygiene day के रूप में मनाने की शुरुआत हुई.

मासिक धर्म पर डॉ ने दी सलाह

क्वीन मेरी अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ एस०पी० जैश्वार ने बतायाकि “लड़कियों का स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किशोरावस्था से ही आरम्भ हो जाना चाहिए। मासिक चक्र की शुरुआत 11से 13 वर्ष की किशोरियों में होती है। किशोरी के प्रजनन तंत्र के स्वस्थ व सामान्य होने का संकेत है। यह पूरी तरह से प्राकृतिक प्रक्रिया है। अशुद्धता से इसका कोई लेना देना नहीं है लेकिन साफ़ सफ़ाई का ख़ास ध्यान और किशोरी को आराम देने की ज़रुरत होती है प्रत्येक लडकी को उनके स्वास्थय से जुड़े पहलुओं पर प्रशिक्षित किया जाना आवश्यक है। इस सन्दर्भ में उन्हें एनीमिया,यौन स्वास्थय,आत्म रक्षा इत्यादि के विषय में जानकारी दी जानी चाहिए।

माहवारी किस उम्र में शुरू हो जाती है।

डॉ ने बतायाकि माहवारी शुरू होने और बंद होने का कोई निश्चित उम्र सीमा नहीं है । यह स्त्री विशेष में क्षेत्रीय वातावरण और रहन सहन के आधार पर अलग-अलग हो सकती है । अमूमन माहवारी के शुरू होने की जो सामान्य समय सीमा है वह 11-12 वर्ष है। यह प्रक्रिया प्रत्येक महीने में 1 से 4 दिन तक चलती है। इसके आने से कोई घबराने की बात नहीं होती। बस लड़कियों को इसके बारे में सही जानकारी होनी चाहिए।

माहवारी शुरू होने से पहले, होने वाली परेशानियां

. सिर दर्द या पेट में ऐंठन।
. छाती में दर्द या भारीपन महसूस होना।
. चिडचिडापन महसूस होना।
. थोड़े समय के लिए वजन बढ़ना तथा भारीपन महसूस करना।
. माहवारी से पहले भूख बहुत लगती हैं।

माहवारी अनियमित होने के खास कारण

डॉ शीला श्रीवास्तवा ने बतायाकि कुछ परिस्थितियों की वजह से माहवारी अनियमित हो सकती है। जिसका कारण शरीर के विकार से होना शुरू होता हैं। जैसे इनमें शामिल है

. हार्मोन संबंधी विकार होना (उदाहरण के लिए पॉलिसि‍स्टिक ओवरी सिंड्रम, थायराइड आदि)
. वज़न सामान्‍य से अधिक अथवा कम होना
. खान-पान संबंधी विकार होना
. बहुत अधिक कसरत करना
. तनाव होना
. कुछ दवाएं लेना (उदाहरण के लिए गर्भनिरोधक इंजेक्‍शन लेना)
. मादक पदार्थों का सेवन करना
. स्‍तनपान कराना

माहवारी के शुरू होने के बाद ध्यान रखे यह बाते

. साफ नैपकिन का करें इस्तेमाल।
. ज्यादा से ज्यादा पानी पीए।
. समय समय पर नैपकिन को बदलती रहे।

माहवारी में हमारे शास्त्रों के अनुसार

. पूजा - पाठ नहीं करना चाहिए
. शादी शुदा महिलाओं को पति के साथ इन दिनों सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए।
. धार्मिक कार्य नहीं करने चाहिए।
. आचार को नहीं छूना चाहिए।

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