
लखनऊ. बीटेक कोर्सेज करवाने वाले जिन संस्थानों में आने वाले पांच साल में लगातार 30 प्रतिशत से कम प्रवेश रहेगा ऐसे संस्थानों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। वहीं स्नातक स्तर पर छात्र-छात्राओं के सर से बोझ को कम करने के लिए 200 क्रेडिट के बीटेक पाठ्यक्रम को 160 क्रेडिट का किए जाने की योजना है। यह कहना था अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के वाइस चेयरमैन प्रो. एमपी पुनिया का जो एकेटीयू न्यू कैंपस में एक बैठक को संबोधित करने आए थे।
यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में एकेटीयू के सरकारी सहायतित व निजी संस्थानों के निदेशकों के साथ एक बैठक आयोजित की गयी जिसमें प्रो. पुनिया ने वर्तमान में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए एआईसीटीई द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं योजनाओं के बारे में चर्चा की। उन्होंने ने बताया कि एआईसीटीई कमजोर संस्थानों में गुणवत्तापरक तकनीकी शिक्षा की सुनिश्चितता के लिए मार्गदर्शन स्कीम के अंतर्गत 50 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है।
ये होंगे बदलाव
स्नातक स्तर पर 160 क्रेडिट का किए जाने की योजना है। इन 160 क्रेडिट्स में से 20 प्रतिशत क्रेडिट ऑनलाइन स्वयं प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध कोर्सो से प्राप्त करने होंगे| साथ ही साथ फर्स्ट ईयर में 21 दिन के ओरिएंटेशन प्रोग्राम से पाठ्यक्रम को शुरू करने की योजना है।
वहीं एमटेक के दो वर्ष के पाठ्यक्रम में अंतिम वर्ष में छात्र-छात्राओं को एक वर्ष के लिए थीसिस करने हेतु इंडस्ट्री (एमएसएमई) में जाना होगा, जहां वे इंडस्ट्री द्वारा दी गयी समस्या पर शोध करना होगा| इस योजना को पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू कर 700 एमटेक छात्र-छात्राओं को एमएसएमई में शोध करने के लिए भेजा गया है|
45 प्रतिशित सीटें खाली रह जाती हैं
प्रो. पुनिया ने बताया कि भारत में इंजीनियरिंग के 10 हजार संस्थान हैं, जिनमें लगभग 37 लाख सीटें हैं। इन सीटों में से लगभग हर साल 21 लाख छात्र-छात्राएं प्रवेश प्राप्त करते हैं और इन 21 लाख में से 13 लाख छात्र-छात्राओं ही पास हो पाते हैं, जिनमें लगभग 6.5 लाख को ही जॉब मिल पाती है। लगभग 45 से 50 प्रतिशत सीटें खाली रह जाने का एक कारण अधिक फीस भी है। बहुत से ऐसे छात्र-छात्राएं हैं जो सिर्फ इसलिए इंजीनियरिंग में प्रवेश लेने से वंचित रह जाते हैं क्योंकि उनके पास फीस भरने के लिए पैसे नहीं होते हैं|
एआईसीटीई सातवां पे कमीशन लागू करने जा रहा है इस पे कमीशन के लागू होते ही शिक्षकों को प्रत्येक वर्ष 15 दिन के लिए इंडस्ट्री ट्रेनिंग पर जाना होगा साथ ही साथ हर वर्ष कम से कम एक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में शामिल होना होगा।
आने वाले वर्षों में इंजीनियरिंग का पाठ्यक्रम संचालित करने वाले निजी विवि की भी सीटों की इनटेक का निर्धारण किए जाने पर विचार किया जा रहा है। यह निर्धारण निजी संस्थानों के लिए प्रभावी एआईसीटीई के मानकों के अनुरूप होगा| साथ ही साथ नीट की तरह काउन्सलिंग के माध्यम से ही इन निजी विवि की भी सीटें भरी जाएंगी।
हिंदी में भी होगी पढ़ाई
प्रदेश में हिंदी में इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रमों को विकसित करने के लिए पहल की जाएगी। इसके लिए हिंदी में टेक्स्ट और ऑडियो-विसुअल पाठ्य सामग्री के विकास पर कार्य शुरू किया जाएगा।
प्रो. पुनिया ने नीट की तरह पूरे देश में इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए सिर्फ एक केंद्रीय इंट्रेंस टेस्ट की बात कही। उन्होंने ने कहा इससे छात्र-छात्राओं को बहुत से फॉर्म भरने से मुक्ति मिलेगी साथ ही साथ संस्थानों की पहुँच भी देशव्यापी हो जाएगी।
यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. पाठक ने कहा कि एआईसीटीई को प्रत्येक प्रदेश में एक नोडल कार्यालय खोलना चाहिए जो कि एआईसीटीई की छात्र-शिक्षक कल्याण एवं पुनर्वास की योजनाओं के बारे में संस्थानों को जागरुक कर सके| डाटा के वेरिफिकेशन के लिए सभी तकनीकी विवि को लिंक करने वाली एक वेबसाइट का निर्माण करवाया जाना चाहिए।
Updated on:
05 Sept 2017 05:46 pm
Published on:
04 Sept 2017 08:28 pm
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