
IAS
लखनऊ. अनुराग तिवारी की मर्डर मिस्ट्री में नया मोड़ आया है। तीन सदस्यों के एक टीम दो दिन के लिए एम्स दिल्ली से राजधानी आई थी। टीम ने ये साफ़ कर दिया किया अनुराग तिवारी की न ही ह्त्या हुई है, न सुसाइड और न ही प्राकृतिक मौत। टीम के इस बयान के बाद अब पूरे मामला में पड़ताल अनुराग के खून में मिलने वाले कैनबिस (भांग/गांजा) के इर्द गिर्द होगी।
एम्स ? से आये फोरेंसिक विशेषज्ञ अब नशीले पदार्थ से अनुराग की मौत की संभावनाए तलाशेगी। अनुराग तिवारी को पिछले साल 17 मई को मेराबाई मार्ग पर वीआईपी गेस्ट हाउस के बाहर मृत पाया गया था। 36 वर्षीय आईएएस अधिकारी अनुराग कर्नाटक कैडर के थे। इस टीम को अपनी अंतिम रिपोर्ट सीबीआई को सौंपने के लिए दो महीने का समय लगेगा।
विशेषज्ञों की टीम का नेतृत्व कर रहे प्रोफेसर आदर्श कुमार ने कहा कि जांच की रेखा अब कैनबिस की भूमिका के आसपास की जाएगी। 'आकस्मिक मृत्यु' में ये एक महत्वपूर्ण सुराग के रूप में उभरी है।
पैनल ने कहा कि अनुराग की मौत एक प्राकृतिक मौत नहीं थी क्योंकि उनके शरीर से कोई बीमारी के सिम्प्टम नहीं मिले हैं। साथ ही हत्या और आत्महत्या की संभावनाए भी खारिज होती हैं क्योंकि इस ओर भी कोई सुराग नहीं मिला है। केवल आकस्मिक मौत की संभावना लग रही हैं। अब इसी बिंदु पर जांच की जाएगी। प्रोफेसर कुमार ने कहा कि तंबाकू और कैनबिस को मिला कर बनी कई सिगरेट भी फोरेंसिक डिपार्टमेंट को मौके से मिली थी।
यह संभावना हो सकती है कि पेचिश या डायरिया के चलते उनकी इम्युनिटी कम हुई हो और गर्मी और अन्य स्थितियों के चलते ऐसा हुआ हो। हम इन सब बिंदुओं पर रिसर्च कर पहलुओं को जोड़ने की कोशिश करेंगे।
एम्स दिल्ली से प्रो कुमार, प्रोफेसर टी मिलो और डॉ अभिषेक यादव की टीम राजधानी आई थी। लोकल टीम सहित उन्होंने वीवीआईपी गेस्ट हॉउस के बाहर घटनास्थल का डेढ़ घंटे निरक्षण किया। इस दौरान कुल 10 बयानों की समीक्षा की गई जिसमें वो चार डॉक्टर शामिल थे जिन्होंने शव परीक्षण किया था। इनके अलावा गेस्ट हाउस के दो गार्ड और बाहर सड़क विक्रेता शामिल थे।
Published on:
07 Mar 2018 12:58 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
