बता दें कि 6 Dec 1992 बाबरी मस्जिद और अयोध्या कांड भारत के इतिहास के काले पन्ने में दर्ज है। जिन्हें चाहकर भी कोई नहीं मिटा सकता। यदि कोई भूलना भी चाहता है तो राजनीतिक दल उसे चुनावी मुद्दा बनाकर फिर से जिंदा कर देते हैं। इस फिल्म का सरकार से कोई लेना देना नहीं है। बल्कि फिल्म बाबरी मस्जिद तोड़े जाने के बाद छिड़े दंगों पर आधारित हैं, जिनमें एक अकेला आदमी सब कुछ संभालने की कोशिश में लगा हुई दिखाई देगा। इस संबंध में जब उत्तर प्रदेश फिल्म बंधु से जुड़े अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमें भी खबरों के माध्यम से पता चला है। लेकिन अभी कोई प्रपोजल हमारी जानकारी में नहीं आया है।