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सुप्रीम कोर्ट ने पलटा यूपी राज्यपाल का फैसला तो अखिलेश यादव ने कही बड़ी बात

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्यपाल के फैसले को पलटने के मामले पर प्रतिक्रिया दी है।

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लखनऊ

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Abhishek Gupta

Dec 04, 2018

Akhilesh Ram Naik

Akhilesh Ram Naik

लखनऊ. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्यपाल के फैसले को पलटने के मामले पर प्रतिक्रिया दी है। दरअसल सोमवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा चार सियासी हत्या के एक दोषी की सजा माफ करने से जुड़े राज्यपाल राम नाईक के फैसले को पलट दिया था। न्यायापालिका ने सवाल उठाते हुए कहा है राज्यपाल ने कैसे अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग किसी ऐसे अपराधी को रिहा करने के लिए किया जो चार हत्याओं का दोषी है। सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मार्कंडेय शाही की याचिका को खारिज करते हुए इस बात पर हैरानी जताई है साथ ही यह भी कहा है यह फैसला राज्यपाल द्वारा तब लिया गया है, जब दोषी को मिली सज़ा के खिलाफ मामला हाईकोर्ट में चल रहा है।

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अखिलेश यादव ने किया ट्वीट-

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को सही करार दिया, वहीं सरकार पर हमला करते हुए न्यायपालिका पर लोगों का विश्वास कायम होने की बात कही है। उन्होंने सोशल मीडिया ट्विटर पर ट्वीट किया और कहा कि जब सरकार अनुचित कार्य करती है, तब न्यायपालिका न्यायोचित निर्णय देती है। आज के युग में जनता सत्ताधारियों से पूरी तरह निराश है, लेकिन न्यायपालिका में आज भी उसका पूरा विश्वास है।

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यह था मामला-

दरअसल 1987 में दोषी मार्कंडेय शाही ने चार हत्याएं की थीं। उस दौरान हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र प्रताप शाही के नियंत्रण में पूरा पूर्वांचल था। इन दोनों में राजनीतिक विरोध था। जहां ये अपराध किए गए थे वो जगह इस वक्त महाराजगंज ज़िले में आती है। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने बीते साल 2017 सितंबर में शाही की सज़ा माफ कर दी थी, जबकि एसएसपी और जिलाधिकारी ने शाही को समय से पूर्व रिहा किए जाने की सिफारिश नहीं की थी। ऐसे में राम नाईक ने संविधान में अनुच्छेद 161 के तहत दिए गए अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए शाही को मुक्त करने का फैसला लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी फैसले पर सोमवार को ऐतराज जताया और इस फैसले को पलट दिया। न्यायपालिका ने राज्यपाल के क्षमादान के निर्णय को अदालत की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला बताया। साथ ही पीठ ने कहा कि राज्यपाल द्वारा लिया गया इस तरह का लिया गया कोई भी निर्णय न्यायिक परीक्षण के दायरे से बाहर नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि दोषी जमानत पर बाहर था, उस वक्त उसने चार अलग-अलग आपराधिक मामलों को भी अंजाम दिया। आजीवन कारावास की सजा में से उसने सिर्फ 7 साल ही काटे थे। ऐसे में उसे क्षमादान कैसे दिया जा सकता है।