
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके भाई प्रतीक यादव को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। कोर्ट ने दिवगंत मुलायम सिंह यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले की सुनवाई बंद कर दी है। सीबीआई की 2013 की क्लोजर रिपोर्ट को कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग को खारिज कर दिया है।
चीफ जस्टिस डी वाई की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि सीबीआई ने प्राथमिक जांच के बाद 7 अगस्त 2013 में मामला बंद कर दिया था। मुलायम सिंह की मृत्यु हो चुकी है और अब इस मामले में कुछ बचा नहीं है।
सीबीआई द्वारा की गई जांच की मांगी गई थी कॉपी
कांग्रेस नेता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने मुलायम सिंह, अखिलेश यादव और प्रतीक यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने मांग की थी कि सीबीआई द्वारा की गई जांच की कॉपी दी जाए। इतना ही नहीं उन्होंने दावा किया था कि सीबीआई ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की।
मामला क्या था?
साल 2005 में कांग्रेस नेता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, बेटे अखिलेश यादव, बहु डिंपल यादव और दूसरे बेटे प्रतीक यादव के खिलाफ एक कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि इन लोगों ने आय से करोड़ों रुपए की अधिक संपत्ति इकट्ठा की है।
डिंपल यादव को कोर्ट ने जांच के दायरे कर दिया हटा
1 मार्च 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई को जांच करने का आदेश दिया। अक्टूबर 2007 में सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि शुरुआती जांच में उसे मुकदमा दर्ज करने लायक सबूत मिले हैं। इसके बाद 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने डिंपल को जांच के दायरे से बाहर कर दिया। मुलायम, अखिलेश और प्रतीक के खिलाफ जांच चलती रही।
मार्च 2019 में याचिकाकर्ता ने कोर्ट में नया आवेदन दाखिल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। सीबीआई से कोर्ट मामले का स्टेटस मांगे। इस मामले पर सुनवाई कर रहे तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने इस बात पर हैरानी जताई कि 12 साल बाद भी जांच में क्या हुआ किसी को कुछ जानकारी ही नही है।
सीबीआई ने कोर्ट से कहा सीवीसी को दी जानकारी
सीबीआई ने उस समय में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मुलायम और उनके दो बेटों- अखिलेश और प्रतीक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने लायक सबूत नहीं मिले थे। इसलिए सात अगस्त, 2013 के बाद मामले में कोई जांच नहीं की गई। सीबीआई ने अपने जवाब में आगे लिखा कि उसने अपना कानूनी दायित्व निभाते हुए केंद्रीय सतर्कता आयोग यानी सीवीसी को इस बात की जानकारी दे दी थी।
आरटीआई के जरिए जवाब मांगा था याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ता ने सीवीवी में आरटीआई लगा कर सीबीआई की रिपोर्ट मांगी थी। जवाब में सीवीसी ने बताया कि उसके पास ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है। उनका आवेदन सीबीआई के मुख्य विजिलेंस अधिकारी को भेजा जा रहा है। आगे की जानकारी के लिए उनसे संपर्क करें। याचिकाकर्ता का दावा है कि सीबीआई ने उन्हें कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई।
कोर्ट ने याचिका को कर दिया खारिज
इसके बाद याचिका कर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया और इस मामले में स्टेटस मांगा। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करते सोमवार को याचिका खारिज कर दिया। इसके साथ ही CBI की क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है।
Updated on:
13 Mar 2023 05:28 pm
Published on:
13 Mar 2023 05:20 pm

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