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आलू किसानों का दर्द: नहीं मिल रहा लागत भाव, दाम या स्टोरेज किसने बढ़ाई परेशानी?

उत्तर प्रदेश में इस बार आलू की बंपर पैदावार हुई है। इससे आलू किसानों को नुकसान हो रहा है। योगी सरकार किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए 650 रुपये प्रति क्विंटल MSP घोषित कर दी है। अब इस पर राजनीति शुरू हो गई है।
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लखनऊ

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Anand Shukla

•

Updated: 13 Mar 2023, 2:18 PM IST

Potato Former

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आलू पर सियासत छिड़ गई है। सरकार ने आलू का समर्थन मूल्य 650 रुपए प्रति क्विंटल तय कर दिया है। आलू के मूल्य को लेकर विपक्षी दल योगी सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा, आलू बदलेगा सरकार, उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आलू उत्पादकों की समस्याओं को हल नहीं कर रही है।

इसके अलावा किसान नेता राकेश टिकैत ने भी आलू के समर्थन मूल्य पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा ''ये रेट कम हैं। आलू का किसान बर्बादी के कगार पर है। व्यापारी सस्ते में आलू खरीद रहा है और उसको कोल्ड स्टोर में भर रहा है। अगर ऐसा ही रहा तो किसान आत्महत्या की कगार पर चला जाएगा।''

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नहीं मिल रहा कोई खरीदार
मार्च का महीना शुरू होते ही किसान खेत में आलू की खुदाई शुरू कर द‌िए हैं। लेकिन उनके सामने एक बहुत बड़ी समस्या आ रही है। आलू खरीदने के लिए कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। अगर कोई खरीदने को भी तैयार है तो सही भाव नहीं दे रहा है।

किसान अपने भाड़े पर आलू को कोल्ड स्टोर में रखने के लिए ले जाए तो उन्हें कोई पता नहीं कितना इंतजार पड़ेगा? ज्यादातर किसानों को कोल्डस्टोर भरा बताकर वापस कर दिया जाता है। प्रदेशभर के आलू किसानों का यही दर्द है।

सरकार तक पहुंचा किसानों का दर्द
किसानों का दर्द सरकार तक पहुंचा तो योगी सरकार ने आलू के न्यूनतम मूल्य को तय कर दिया। लेकिन अब इस पर राजनीति शुरू हो गई है।

अब सवाल ये उठ रहे हैं कि आलू किसानों की दुर्दशा की वजह क्या है? ये नौबत आई क्यों और सरकार जो प्रयास कर रही है, वे कितने कारगर होंगे? इन सबका जवाब जानने से पहले लागत और नफा-नुकसान का गणित समझना जरूरी है।

नफा-नुकसान की बात करें तो सामान्य तौर पर एक हेक्टेअर में 300 क्विंटल आलू पैदा होता है। बाजार में बेचने पर 350 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से उसे 1,05,000 लाख रुपये मिलेंगे। लागत 1,42, 000 रुपये है। इस तरह बाजार में बेचने पर किसान को 37 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। सरकार ने जो रेट तय किए हैं, उसके अनुसार उसे 1,95,000 रुपये मिलेंगे। ऐसे में उसे एक हेक्टेअर में 53 हजार रुपये मुनाफा होगा।

यूपी में सबसे ज्यादा आलू

यूपी सबसे ज्यादा आलू पैदा करने वाला राज्य है। देश का लगभग 35% आलू यहां पैदा होता है। इसके अलावा पंजाब, बिहार, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में भी आलू की खेती होती है।

दरअसल, इस साल 6.94 लाख हेक्टेयर जमीन पर आलू की बुआई हुई है। ऐसे में इस बार 242 लाख मीट्रिक टन से अधिक पैदावार की उम्मीद है, लेकिन आलू की बंपर पैदावार की वजह से उन्हें दाम मिलने की जगह लागत निकालना मुश्किल पड़ रहा है।

हर साल बढ़ रही है आलू की पैदावार
यूपी में लगातार आलू की पैदावार बढ़ रही है। ऐसे में आलू को रखने के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। अगर हम पिछले 5 साल के आंकड़ों को देंखे तो स्थिति साफ हो जाती है।


वर्ष - उत्पादन (लाख टन)

2018 - 19 155.23

2019 - 20 140.04

2020 - 21 158.40

2021 - 22 242.75

2022-23 - 242.93 (अनुमानित)

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भंडारण के मुकाबले आलू की पैदावार ज्यादा
यूपी में इस साल लगभग 242.93 लाख टन की आलू की पैदावार हुई है। कोल्ड स्टोर में रखने की क्षमता 162 लाख टन है। इस बार प्रदेश में कुल उत्पादन के मुकाबले भंडारण क्षमता कम है। कोल्ड स्टोर में जितनी क्षमता है, उसका भी 80-85% आलू ही जमा होता है। सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन आलू खरीदने का लक्ष्य तय किया है। जबकि इस साल 242 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा आलू की पैदावार हुई है।

मौसम के कारण बढ़ा आलू का उत्पादन
अब बात मौसम की करते हैं। बेमौसम बारिश और घटता-बढ़ता तापमान फसल को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। इस बार अक्टूबर में बारिश हो गई, जिससे खेतों में पानी भरा रहा। इससे किसान अगेती फसल की बोआई नहीं कर पाए। उसके बाद जब मौसम सही हुआ तो फिर सबने आलू बो दिया। इस तरह 10 प्रतिशत आलू सीजन में ज्यादा हो गया।

7 जिलो में स्थापित होगा केंद्र
जब फसल की ज्यादा पैदावार हो जाती है तो किसानों के सामने संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे में सरकार किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रयास करती है। इसी वजह से योगी सरकार ने अब निर्यात शुरू किया है। लेकिन वह उत्पादन के मुकाबले काफी कम है। नेपाल से हाफेड ने 15000 मीट्रिक टन का कॉन्ट्रेक्ट किया है। वहीं, आगरा से मलेशिया, दुबई और कतर के लिए अभी 600 मीट्रिक टन आलू भेजा गया है। पहले फेज में हाफेड राज्य के 7 जनपदों में क्रय विक्रय केंद्र स्थापित होगा।

केंद्र सरकार की ‘बाजार हस्तक्षेप’ योजना के तहत आलू की खरीद करती है। यह खरीद तब की जाती है जब पिछले साल से बाजार में मूल्य 10 प्रतिशत कम हो या फिर पिछले साल से 10 प्रतिशत उत्पादन ज्यादा हो। इससे पहले 2017 में आलू खरीदा गया था लेकिन किसानों को कोई खास लाभ इसका नहीं हुआ। तब महज 1293.70 मीट्रिक टन आलू की खरीद हुई थी।