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दिल्ली में खाने की टेबिल पर मायावती के साथ हुई 2019 की जीत के लिए बात : अखिलेश

दिल्ली में खाने की टेबिल पर मायावती के साथ हुई 2019 की जीत के लिए बात-अखिलेश

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लखनऊ

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Ruchi Sharma

Apr 15, 2018

akhilesh yadav

akhilesh yadav

लखनऊ. 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों में सभी राजनीतिक दल जुट गए हैं। इसको लेकर सभी पार्टियां काफी गहन मंथन पर रही है। एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में सूबे की 80 सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि बहुजन समाज पार्टी के साथ उनका गठबंधन तय है और दोनों पार्टियां मिलकर 2019 के चुनाव में धमाकेदार प्रदर्शन कर भाजपा को टक्कर देगी।यह बात अखिलेश यादव ने एक हिंदी न्यूज चैनल में बातचीत के दौरान कही।

सीएम योगी पर कसा तंज

इस बातचीत में अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए कहा कि जिन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अखिलेश की जगह ली थी, उन्होंने कहा, 'यूपी की जनता ने उनको वोट नहीं दिया था। लोगों ने नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट दिया था। आगे उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को चाहिए था कि वे सूबे को एक अच्छा मुख्यमंत्री देते।

'सीएम योगी अच्छे साधु हो सकते है, लेकिन अच्छे सीएम नहीं'

वहीं उन्होंने कहा कि यूपी में कहीं न्याय नहीं हो रहा। जनता को कही से बी न्याय नहीं मिल रहा है। सीएम योगी ज्यादातर धार्मिक क्रियाकलापों नजर आते हैं। वे एक अच्छे साधु हो सकते हैं, लेकिन अच्छे मुख्यमंत्री नहीं हैं।

खाने की टेबिल पर बनी गठबंधन की बात

बसपा के साथ गठबंधन को लेकर अखिलेश यादव खुलकर बोलते हुए कहा कि पार्टी नेता गठबंधन चाहते थे, साथ ही काडर और वोटर भी दोनों पार्टियों के गठबंधन के पक्ष में थे। उन्होंने कहा कि पहले बात बैक चैनल के जरिए ही शुरू हुई और फिर मैंने मायावतीजी से फोन पर बात की। फिर हमने कांग्रेस के निमंत्रण पर दिल्ली में बैठक के दौरान एक साथ एक ही टेबल पर खाना खाया, जहां बहुत सारी बातें हुईं, जिसको बताना जरूरी नहीं है। क्योंकि बीजेपी बहुत ही होशियार पार्टी है।

पिछली कड़वाहटों को लेकर बोले अखिलेश

बसपा के साथ अपनी पिछली कड़वाहटों को भुलाने के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी की स्थापना मुलायम सिंह यादव ने की थी, लेकिन अब यह एक नई पार्टी है। गठबंधन की मजबूती के लिए हमें अपना पिछला इतिहास भूलना होगा। जानकारी हो कि 2 जून 1995 के कुख्यात गेस्ट हाउस कांड के बाद सपा और बसपा के रिश्ते कभी भी सहज नहीं रहे।