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इंजीनियरिंग का हाल, AKTU के 150 संस्थानों में एक भी एडमिशन नहीं

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के प्रति बढ़ती उदासीनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस बार डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी से संबद्ध 150 संस्थानों में काउंसलिंग के दौरान एक भी एडमिशन नहीं हुआ है।
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लखनऊ

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Prashant Srivastava

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Updated: 23 Jul 2018, 12:33 PM IST

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इंजीनियरिंग का हाल, AKTU के 150 संस्थानों में एक भी एडमिशन नहीं

लखनऊ. इंजीनियरिंग की पढ़ाई के प्रति बढ़ती उदासीनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस बार डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी से संबद्ध 150 संस्थानों में काउंसलिंग के दौरान एक भी एडमिशन नहीं हुआ है। बता दें कि यूपीएसईई की काउंसलिंग के सभी चरण पूरे हो गए हैं। अभी भी 70 प्रतिशत से ज्यादा सीटें खाली हैं।एकेटीयू प्रशासन इन सभी कॉलेजों की सूची तैयार कर रहा है जिसमें राजधानी के भी तीन कॉलेज शामिल हैं।

एक भी एडमिशन नहीं

वहीं कई टॉप कॉलेज भी इस बार काउंसलिंग से सीटें भरने में असफल हुए हैं। यूपीएसईई को-ऑर्डिनेटर प्रो. एके कटियार ने बताया कि प्रदेश में यूनिवर्सिटी से संबद्ध से 597 इंजिनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेज हैं। यूपीएसईई में 1 लाख 26 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे लेकिन काउंसलिंग में महज पचास हजार अभ्यर्थी ही शामिल हुए, उनमे भी सिर्फ 29,495 अभ्यर्थियों ने दाखिला लिया है। काउंसलिंग के सभी चरण पूरे चुके हैं। ऐसे में प्रदेश के 150 संस्थानों में एक भी दाखिला नहीं हुआ। हालांकि, अब कॉलेजों में सीधे दाखिले चल रहे हैं। लेकिन इसका आंकड़ा अभी नहीं मिला है। सूत्रों के मुताबिक, इन 150 कॉलेजों में सीधे दाखिला भी कोई नहीं ले रहा है।

बंद हो सकते हैं कई संस्थान

इंजीनियरिंग के प्रति किस तरह से क्रेज घट रहा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गलगोटिया, एकेजे समेत राजधानी व अन्य शीर्ष संस्थानों की भी सीटें नहीं भर सकी हैं। हालांकि इन संस्थानों में खाली सीटों की संख्या काफी कम हैं। कुछ दिन बाद एकेटीयू इससे संबंधित जानकारी साझा कर खाली सीटों का ब्योरा जारी करेगा।प्रत्येक निजी संस्थान में 15 फीसदी सीटें मैनेजमेंट कोटे की होती हैं। अन्य दस फीसदी सीटें एनआरआई की होती हैं। इन सीटों पर संस्थान अपने स्तर से दाखिले कर सकते हैं। एकेटीयू प्रशासन को अब सीधे दाखिलों से ही सीटें भरने की उम्मीद है। जिन कॉलेजों में एडमिशन नहीं हो रहे हैं एकेटीयू प्रशासन उन्हें बंद करने की तैयारी कर रहा है। सूची तैयार कर जल्द ही सभी संस्थानों के निदेशकों के साथ बैठक की जाएगी। इसमें कॉलेजों से मान्यता वापस ली जा सकती है। आईसीटीई के नियमानुसार जब किसी संस्थान में तीस प्रतिशत से कम दाखिले होते हैं तो आने वाले सत्र में उस संस्थान की सीटें कम कर दी जाती है। इसी तरह से यदि तीन साल तक ये स्थिति बनी रहती है तो उसकी मान्यता वापस ले ली जाती है।