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प्रदेश में चल रही एम्बुलेंस सेवा 108 और 102 के बारे में शायद ये बातें नहीं जानते होंगे आप

उत्तर प्रदेश में 108 एम्बुलेंस सेवा (समाजवादी स्वास्थ्य सेवा ) 14 सितंबर 2012 को शुरू हुई थी। वहीं 102 एम्बुलेंस सेवा (नेशनल एम्बुलेंस सर्विस) की शुरुआत 17 जनवरी 2014 को हुई थी।

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Rohit Singh

May 11, 2016

ambulance sewa

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लखनऊ।
आज से करीब तीन साल पहले प्रदेश के लोगों के लिए आपातकाल में तुरंत एम्बुलेंस मिलना मुश्किल हो जाता था। साथ ही फ्री में मिलना तो लोगों के लिए मात्र एक कल्पना थी लेकिन आज एम्बुलेंस सेवा 108 और 102 ने इस सपने को हकीकत में बदल दिया है। इस बारे में एम्बुलेंस संचालक संस्था जीवीके एमआरआई की उपलब्धियों के बारे में बता रहे हैं सीओओ संजय खोसला :


उत्तर प्रदेश में 108 एम्बुलेंस सेवा (समाजवादी स्वास्थ्य सेवा ) 14 सितंबर 2012 को शुरू हुई थी। वहीं 102 एम्बुलेंस सेवा (नेशनल एम्बुलेंस सर्विस) की शुरुआत 17 जनवरी 2014 को हुई थी। प्रदेश में जीवीके एमआरआई संस्था इनका संचालन कर रही है।


अब तक 57 लाख लोगों की मदद
108 एम्बुलेस सेवा शुरू से अब तक 57 लाख से अधिक लोगों की मदद कर चुकी है। वर्तमान समय में प्रदेश में 1488 एम्बुलेंस संचालित हैं।बीती 10 मई तक इस एम्बुलेंस से लाभान्वित लोगों का आंकड़ा 5762455 पहुँच चुका है। इसमें सड़क दुर्घटना के 484098 , पेट दर्द के 368882, सांस में तकलीफ के 164692, ह्रदय रोग के 120308 लाभार्थी शामिल हैं। इसके अलावा एम्बुलेंस सेवा में अब तक 16324 बच्चों का सुरक्षित जन्म भी हो चुका है। जिससे एम्बुलेंस के तकनीकी स्टाफ ने परिजनों की मदद से सफल कराया। साथ ही घटनास्थल पर प्रसव का आंकड़ा 69930 पहुँच चुका है।


क्या है 108
-
108 तीन अंकों का एक निशुल्क नंबर है। इसका उपयोग चिकित्सा, पुलिस व आग से सम्बंधित आपातकालीन स्थितियों में किया जाता है।

- 108 सेवा एक निशुल्क सेवा है जो 24 घंटे व 365 दिन जनहित के लिए उपलब्ध है।

- 108 नंबर किसिस भी मोबाइल फोन या लैंडलाइन से डायल किया जा सकता है।

-
108 सेवा समाज के हर वर्ग के लिए है, इसमें एपीएल और बीपीएल का कोई बंधन नहीं है।


कब डायल करें 108 नंबर
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दिल का दौरा (हार्ट अटैक ) पड़ने पर।

- तेज पेट दर्द, सांस में तकलीफ होने पर।

- किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने पर।

- जानवरों के काटने, अचानक बेहोश होने पर।

- जब कोई अपराध हो रहा हो या आग लग गयी हो , उस समय फायर बिग्रेड और एम्बुलेंस की आवश्यकता हो।

- इसके आलावा अन्य किसी प्रकार की इमरजेंसी की स्थिति में।


एम्बुलेंस 102 ने बनाया रिकॉर्ड
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एम्बुलेंस सेवा 102 की शुरुआत प्रदेश में 17 जनवरी 2014 को हुई थी।

- शुरू से अब तक एम्बुलेंस सेवा 102 ने 99 लाख से अधिक महिलाओं व बच्चों की मदद की है।

- वर्तमान में प्रदेश में इस सेवा के तहत 2268 एम्बुलेंस संचालित हैं।
- आने वाले समय में बहुत जल्द इस सेवा में 200 एम्बुलेंस सेवा जुड़ जाएंगी।

102 क्या है
- 102 तीन अंकों का टोल फ्री नंबर है और इस पर फ़ोन करने वाले को कोई पैसा नहीं पड़ेगा।
- 102 सेवा एक निशुल्क एम्बुलेंस सेवा है, इस पर 24 घंटे व 365 दिन फ़ोन किया जा सकता है।
- 102 नंबर पर लैंडलाइन और मोबाइल दोनों से कॉल की जा सकती है।
- 102 नंबर पर फ़ोन करने के बाद शीघ्ही नजदीकी एम्बुलेंस कॉल के लिए पहुंचेगी।

कब डायल करें 102
- 102 एम्बुलेंस सेवा में गर्भवती महिला को घर से अस्पताल तक लाने और वापस घर तक छोड़ने की मिलती है।
- इसके आलावा बेहतर इलाज के लिए गर्भवती महिला व शिशु को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक छोड़ा जाएगा।
- इस एंबुलेंस सेवा में एक साल तक के बच्चों को किसी भी प्रकार की बीमारी होने पर घर से अस्पताल लाने और वापस अस्पताल से घर छोड़ने की उपलब्ध है।

बेवजह न करें फ़ोन
108 और 102 के आशियाना सयहित कॉल सेंटर में हर रोज हजारों आवाश्यक कॉल्स आती हैं जिसकी वजह से आपताकालीन सेवाओं में बाधा पड़ती है। साथ ही जरूरतमंदों को समय पर सेवा नहीं मिल पाती है। इसलिए ये ध्यान रखें कि अनावश्यक कॉल न करके आप किसी की जिंदगी बचा रहे हैं :

इको फ्रेंडली की ओर एम्बुलेंस सेवा
पर्यावरण को बचाने के दिशा में भी एम्बुलेंस सेवा 108 और 102 अपना योगदान दे रहीं हैं। इस दोनों स्वाओं की प्रदेश भर में तैनात सभी 3756 एम्बुलेंस में एंड्रॉयड मोबाइल फ़ोन उपलब्ध कराये गए हैं। जिसके बाद एम्बुलेंस से जुडी रिपोर्टिंग, स्टाफ की स्थिति, सहित अन्य दैनिक कार्य इसी आधुनिक फोन के जरिये किये जा रहे हैं। इस तरह से एम्बुलेंस का दैनिक कामकाज पेपरलेस हो गया है। मई माह के अन्त तक बाकी 20 जिलों में भी इस नई तकनीक को लागू कर दिया जाएगा।


देखें वीडियो :

https://youtu.be/KAMKl5KLJXU

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