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2023 में तीसरी बार आया Earthquake, रिक्टर स्केल के जरिये जानिए कब आ सकती है तबाही

ऑफिस में कुछ लोग साथ में लंच कर रहे थे, अचानक लोगों ने एक दूसरे से कहा, अरे यार, भूंकप आ गया। और एक दूसरे का मुंह देखने लगे। पैरों में कंपन महसूस करने लगे।

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लखनऊ

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Krishna Pandey

Jan 27, 2023

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इस बार भूकंप की तीव्रता 5.4 बताई जा रही है। भूकंप का असर यूपी के साथ-साथ दिल्ली और एनसीआर में भी देखने को मिला। भूकंप का केंद्र नेपाल-चीन बॉर्डर बताया जा रहा है।

2023 में अब तक 3 बार भूकंप आ चुका है। अब आप सोच रहे होंगे, इतनी बार भूकंप क्यों आया , भूकंप से जुड़ी हर जानकारी आज हम आपको देंगे।

भूकंप कैसे और क्‍यों आता है

इसे वैज्ञानिक रूप से समझने के लिए हमें पृथ्‍वी की संरचना को समझना होगा। दरअसल ये पृथ्‍वी टैक्टोनिक प्लेटों पर स्थित है। इसके नीचे तरल पदार्थ लावा है। ये प्लेट्स जो लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं।


बार-बार टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्‍यादा दबाव पड़ने पर ये प्‍लेट्स टूटने लगती हैं। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्‍ता खोजती है और इस डिस्‍टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।

भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्‍थान पर भूकंप का असर सबसे ज्‍यादा होता है और सबसे तेज कंपन होता है।

भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से की जाती है

रिक्‍टर स्‍केल भूकंप की तरंगों की तीव्रता मापने का एक गणितीय पैमाना होता है, इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। ये स्‍केल भूकंप के दौरान धरती के भीतर से निकली ऊर्जा के आधार पर तीव्रता को मापता है।

क्या होता है भूकंप का केंद्र?
धरती की सतह के नीचे की वह जगह, जहां पर चट्टानें आपस में टकराती हैंं या टूटती हैं, भूकंप का केंद्र या फोकस कहलाता है. इसे हाइपोसेंटर भी कहते हैं. इस केंद्र से ही ऊर्जा तरंगों के रूप में बतौर कंपन फैलती है और भूकंप आता है. यह कंपन एकदम उसी तरह होता है, जैसे शांत तालाब में पत्थर फेंकने पर तरंगें फैलती हैं.


विज्ञान की भाषा में समझें तो धरती के केंद्र और भूकंप के केंद्र को आपस में जोड़ने वाली रेखा जिस स्थान पर धरती की सतह को काटती है, उस जगह को ही भूकंप का अभिकेंद्र या एपिक सेंटर कहा जाता है। विज्ञान के नियमों के हिसाब से धरती की सतह का यह स्थान भूकंप के केंद्र से सबसे पास होता है।


कैसे मापते हैं भूकंप की तीव्रता और क्‍या है तरीका

भूकंप की जांच जिस स्‍केल से होती है उसे रिक्‍टर मैग्‍नीट्यूड टेस्‍ट कहा जाता है। भूकंप की तीव्रता 1 से 9 के आधार तक मापा जाता है। भूकंप को इसके सेंटर से मापा जाता है । जिसे एपीसेंटर कहते हैं। भूंकप के दौरान धरती के अंदर से निकलने वाली ऊर्जा कितनी तीव्र होती है, उसे एपीसेंटर से मापा जाता है और भूकंप के खतरे का अंदाजा लगाया जाता है।

रिक्‍टर स्‍केल से जाने भूकंप का खतरा, कितनी तबाही लाता है भूकंप?

0 से 1.9 के बीच - यह सिर्फ सिज्‍मोग्राफ के द्वारा ही पता चलता है।

2 से 2.9 के बीच - हल्‍का कंपन होने लगता है।

3 से 3.9 के बीच - आप चलती ट्रेन के पास खड़ें होते हैं।

4 से 4.9 के बीच - दिवारों पर टंगी घड़ी, फ्रेम हिलने लगती है।

5 से 5.9 के बीच - फर्नीचर हिलने लगता है।

6 से 6.9 के बीच - इमारतों में दरार पैदा होना, उपरी की मंजिलों में नुकसान होने की संभावना।

7 से 7.9 के बीच - जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं, इमारतें गिरने लग जाती है।

8 से 8.9 के बीच - सुनामी का खतरा बढ़ जाता है, इमारतों सहित बड़े पुल गिरने की संभावना बढ़ जाती हैं।

9 और इससे अधिक - यह सबसे बड़ा तबाही का बिंदु होता है। समुद्र आसपास हो तो सुनामी की संभावना बढ़ जाती है। इंसान को धरती लहराते हुए नजर आने लगेगी।

भूकंप आने पर कैसे बचाएं जान
भूकंप की भविष्‍यवाणी नहीं की जा सकती है। लेकिन नए घरों को भूकंप को ध्‍यान में रखते हुए निर्माण करें। मकान बनाने से पहले जमीन की जांच कर लें। क्‍या वह भूकंप को ध्‍यान में रखते हुए मकान बना सकते हैं या नहीं। वहीं अगर अचानक से भूकंप आ जाएं तो सब पहले खुले मैदान में जाए। घर में ही फंस गए हों तो टेबल या बेड के अंदर छिप जाएं। छत पर भी जा सकते हैं या घर के किसी कोने में खड़े हो जाएं। लेकिन खतरों से खाली विकल्‍प है घर से बाहर निकल जाएं।