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हाईकोर्ट ने अनुदेशकों को दी बहुत बड़ी राहत, सरकार को तगड़ा झटका देकर सुनाया ये अहम फैसला

- हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अनुदेशकों के पक्ष में सुनाया फैसला - अनुदेशकों का 17 हजार ही रहेगा मानदेय, एरियर भी मिलेगा - सरकार ने अनुदेशकों का मानदेय घटाकर 9,800 रुपये कर दिया था - हाईकोर्ट ने योगी आदित्यनाथ सरकार के फैसले को गैरकानूनी बताया

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लखनऊ

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Nitin Srivastva

Jul 04, 2019

Anudeshak Mandey decision from High Court Lucknow Bench

हाईकोर्ट ने अनुदेशकों को दी बहुत बड़ी राहत, सरकार को झटका देकर सुनाया ये फैसला

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में तैनात तीस हजार से ज्यादा अनुदेशकों (Anudeshak) को हाईकोर्ट (Highcourt) से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अनुदेशकों के मानदेय को कम किये जाने के योगी सरकार के फैसले को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के मुताबित अनुदेशकों का मानदेय पहले की तरह 17 हजार रुपये ही रहेगा। हाईकोर्ट ने अनुदेशकों के मानदेय (Anudeshak Mandey) को कम करने के फैसले को प्रताड़ित करने वाला बताया। कोर्ट ने सरकार को आदेश जारी किये कि अनुदेशकों को दिए जाने वाला एरियर भी उन्हें नौ फीसदी ब्याज के साथ दिया जाए। आपको बता दें कि अनुदेशकों को 17,000 हर महीने मानदेय दिए जाने के प्रस्ताव पर केंद्र की मोदी सरकार (Narendra Modi Government) की सहमति के बाद भी योगी सरकार (Yogi Adityanath Government) की कार्यकारी समिति ने 2 जनवरी, 2018 को मानदेय घटाकर 9,800 रुपये हर महीने करने का फैसला किया था।

सरकार का फैसला गैरकानूनी

जस्टिस राजेश सिंह चौहान ने इस मामले में दायर याचिकाओं में पक्षकार बनाए गए मुख्य सचिव और सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक को आदेश देते हुए कहा कि वह अनुदेशकों को मार्च 2017 से अब तक का बढ़ाया गया मासिक मानदेय (17,000 रुपये के हिसाब से) के एरियर का भुगतान करें। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा कि यूपी की कार्यकारी समिति को मानदेय घटाने का कोई अधिकार नहीं है। यह पूरी तरह से गलत है। याचिकाओं पर अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि याचियों को 9,800 रुपए मासिक मानदेय का भी भुगतान नहीं किया जा रहा बल्कि उन्हें 8,470 रुपये मासिक दिया जा रहा था। जबकि दिसंबर 2018 के बाद तो कोई भुगतान भी नहीं किया गया। कानून के मुताबिक योगी सरकार का यह फैसला गैरकानूनी है और उसे वैधानिक प्रावधान के ऊपर अपना फैसला सुनाने का अधिकार नहीं। इसलिए राज्य सरकार के आदेश को खारिज किया जाता है।


यह है पूरा मामला

- 2013 में प्रदेश के परिषदीय जूनियर विद्यालयों में कक्षा छह से आठ तक के लिए कुल 41,307 पद घोषित हुए थे।

- अनुदेशकों का सेलेक्शन तीन श्रेणियों (शारीरिक शिक्षा अनुदेशक, कला शिक्षा अनुदेशक व कंप्यूटर/कृषि शिक्षा अनुदेशक) में किया जाना था।

- तीनों ही श्रेणियों में 13,769 पद प्रति श्रेणी पर चयन होना था।

- अनुदेशकों के लिए पहले सात हजार रुपये मासिक मानदेय तय हुआ था। साल 2016-17 में इसमें 1,470 रुपये की वृद्धि कर इसे 8,470 रुपये प्रति माह कर दिया गया।

- 2017-18 में राज्य सरकार ने अनुदेशकों का मानदेय 17 हजार रुपये करने का प्रस्ताव केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को भेजा जिसे प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में मंजूरी दे दी गई।

- केंद्र की मंजूरी के बाद भी राज्य कार्यकारी समिति की बैठक में इसमें संशोधन करते हुए 17 हजार की जगह 9,800 रुपये मासिक कर दिया।

- सरकार के फैसले को दो अलग याचिकाओं के जरिये हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चुनौती दी गई। जिस पर न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की एकल पीठ ने सरकार के फैसले को गतल बताया।