
Apollo
लखनऊ. अपोलो मेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के किडनी ट्रांसप्लांट टीम के डॉक्टरों ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। डॉक्टरों ने राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित ट्रांसप्लांट कमेटी से स्वीकृति मिलने के बाद एक महीने में एबीओ इनकम्पेटिबल व मल्टीपल रीनल आर्टरीज सहित एक अन्य किडनी ट्रांसप्लांट किया है। एबीओ इनकम्पेटिबल एक ऐसी स्थिति है, जिसमें अलग-अलग ब्लड ग्रुप के डोनर और रिसीवर का ट्रांसप्लांट सामान्य ब्लड ग्रुप वालों की तुलना में जटिल व जोखिम भरा होता है। लेकिन तीनों ट्रांसप्लांट सफल होने पर अपोलो मेडिक्स बेहद खुश है।
अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट डॉ. अरुण कुमार, यूरोलॉजिस्ट व किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन, डॉ. राहुल यादव व डॉ. आदित्य के. शर्मा और एनेस्थिसियोलॉजिस्ट टीम के हेड डॉ. मनीष द्वारा इस ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक किया गया।
अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि एबीओ इनकम्पेटिबल ट्रांसप्लांट एक जटिल प्रक्रिया है। इसके लिए बेहतरीन अत्याधुनिक सुविधाओं और तकनीकों की जरूरत होती है। हमें खुशी है कि किडनी ट्रांसप्लांट शुरू होने के एक महीने के अंदर हम इस तरह की जटिल सर्जरी करने में कामयाब रहे।
यूपी बस्ती निवासी 34 वर्षीय मरीज (जिसका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव था) की दोनों किडनी खराब थीं।। उनके 65 वर्षीय पिता, जिनका ब्लड ग्रुप बी + था, उन्होंने अपने बेटे को अपनी किडनी दान करने का फैसला किया। एबीओ इनकम्पेटिबल के साथ ही डोनर की ज्यादा उम्र व फेफड़ों की बीमारी इस सर्जरी के लिए अत्यधिक चुनौतीपूर्ण बन गया था।
उन्होंने यह भी बताया कि दूसरा जटिल ट्रांसप्लांट जो हमने किया, वह गोंडा के एक मरीज का था, जिन्हें उनकी पत्नी ने एक ही रक्त प्रकार ओ + के साथ किडनी दान की, जिसमें मल्टीपल रीनल आर्टरीज की स्थिति देखी गयी। इसके वजह से यह सर्जरी जटिल हो गयी थी। सभी कठिनाइयों, जटिलता और चुनौतियों के बावजूद, हमने यह किया और अब हमारे सभी 3 मरीज और दाता बिना किसी अन्य जटिलता के स्वस्थ हैं।
अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के यूरोलॉजिस्ट व किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन, डॉ. राहुल यादव व डॉ. आदित्य के. शर्मा ने कहा, ष्एबीओ इनकम्पेटिबल के मामलों में विफलता और अस्वीकृति की संभावना अधिक होती है। क्यूंकि डोनर सीओपीडी जैसी गंभीर समस्या से भी पीड़ित था इसलिए हमने लेप्रोस्कोपिक /मिनिमली इनवेसिव सर्जरी का प्रयोग किया जिसमें बहुत ही छोटे से चीरे के जरिये कम दबाव पर डोनर की किडनी निकाली गयी।"
Published on:
29 Jan 2020 09:09 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
