13 मार्च 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

UP Politics: कांशीराम को लेकर राहुल के बयान पर असीम अरुण का पलटवार, पढ़ें ‘चमचा युग’

Asim Arun Statement: लखनऊ में कांशीराम जयंती कार्यक्रम में राहुल गांधी के बयान पर मंत्री असीम अरुण ने पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस पर दलित राजनीति को लेकर बनावटी प्रेम दिखाने और इतिहास भूलने का आरोप लगाया।

4 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Ritesh Singh

Mar 13, 2026

कांशीराम की विरासत पर सियासी घमासान (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

कांशीराम की विरासत पर सियासी घमासान (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

UP Political Debate: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोट बैंक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। बहुजन आंदोलन के संस्थापक कांशीराम की जयंती के अवसर पर कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी सामने आई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा कांशीराम को लेकर दिए गए बयान के बाद प्रदेश सरकार में समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को “बनावटी प्रेम” बताते हुए कहा कि राहुल गांधी को कांशीराम के विचारों को समझने के लिए उनकी लिखी पुस्तक ‘चमचा युग’ पढ़नी चाहिए।

राहुल गांधी का बयान बना विवाद की वजह

दरअसल, लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘सामाजिक परिवर्तन दिवस’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कांशीराम को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा कि यदि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू आज जीवित होते, तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते।

यह कार्यक्रम कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अनुसूचित जाति विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस दौरान पार्टी ने प्रस्ताव पारित कर कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग भी की। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि कांशीराम ने सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई लड़ी और देश के दलित समाज को राजनीतिक पहचान दिलाई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए दलित समुदाय को आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा है।

असीम अरुण का तीखा पलटवार

राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री असीम अरुण ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इतिहास और राजनीति की सही जानकारी नहीं है। असीम अरुण ने कहा,“माननीय कांशीराम ने कांग्रेस के खिलाफ ही बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की थी। कांग्रेस की दलित विरोधी नीतियों के खिलाफ उन्होंने पूरी किताब लिखी थी। राहुल गांधी को कांशीराम जी की किताब ‘चमचा युग’ जरूर पढ़नी चाहिए।”उन्होंने कहा कि कांशीराम का मानना था कि कांग्रेस की नीतियों के कारण दलित समाज का शोषण हुआ और दलित नेतृत्व को उभरने नहीं दिया गया।

कांग्रेस पर लगाया ‘बनावटी प्रेम’ का आरोप

मंत्री असीम अरुण ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह केवल चुनावी लाभ के लिए कांशीराम की विरासत का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में कभी कांशीराम को सम्मान नहीं दिया। बल्कि उन्हें राजनीतिक रूप से अलग-थलग रखने की कोशिश की गई। असीम अरुण के अनुसार कांग्रेस अब केवल दलित वोटों को आकर्षित करने के लिए कांशीराम के नाम का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस पार्टी कांशीराम जी को अछूत मानती थी और उनके जीते जी उन्हें कभी सम्मान नहीं दिया। आज वही पार्टी वोट के लिए उनके नाम का इस्तेमाल कर रही है।”

कांशीराम और कांग्रेस के रिश्ते

राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना कांग्रेस के विरोध के आधार पर की थी। उनका मानना था कि कांग्रेस की नीतियों ने दलित समाज को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया।

कांशीराम ने अपने राजनीतिक जीवन में कई बार कांग्रेस की आलोचना की और दलितों के स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया। उनकी पुस्तक ‘चमचा युग’ में भी उन्होंने ऐसे नेताओं की आलोचना की है, जो दलित समाज के नाम पर राजनीति करते हैं लेकिन वास्तव में मुख्यधारा की पार्टियों के हितों के लिए काम करते हैं।

2027 चुनाव से पहले दलित वोटों की राजनीति

उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित वोट बैंक हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। राज्य में दलित मतदाताओं की बड़ी संख्या होने के कारण लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दल उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश करते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बसपा की कमजोर होती स्थिति के कारण दलित वोटों के लिए कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच नई राजनीतिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। कांग्रेस का कांशीराम की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करना और उन्हें भारत रत्न देने की मांग करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सपा और कांग्रेस की होड़

दिलचस्प बात यह है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों ही कांशीराम की विचारधारा और विरासत को अपने पक्ष में बताने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि राजनीतिक इतिहास यह बताता है कि कांशीराम ने अपनी राजनीति कांग्रेस और समाजवादी धारा दोनों से अलग पहचान बनाते हुए शुरू की थी। उन्होंने दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों को संगठित कर बहुजन आंदोलन को नई दिशा दी।

बसपा की विरासत और मायावती की भूमिका

बहुजन समाज पार्टी की स्थापना कांशीराम ने की थी और बाद में मायावती को अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में आगे बढ़ाया। मायावती के नेतृत्व में बसपा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाया और कई बार सरकार भी बनाई। विशेषज्ञों का मानना है कि कांशीराम की राजनीतिक विरासत पर सबसे बड़ा अधिकार मायावती का ही माना जाता है। हालांकि वर्तमान समय में बसपा की राजनीतिक स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही है, जिसके कारण अन्य दल इस राजनीतिक खाली स्थान को भरने की कोशिश कर रहे हैं।

भाजपा की रणनीति

भारतीय जनता पार्टी भी दलित समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पार्टी ने कई योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से दलित समाज को जोड़ने की कोशिश की है। असीम अरुण का बयान भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें भाजपा कांग्रेस और सपा पर दलित राजनीति को लेकर सवाल उठा रही है।

राजनीतिक माहौल हुआ गर्म

राहुल गांधी के बयान और उसके बाद असीम अरुण के पलटवार ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को और गर्म कर दिया है। आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव के करीब आते-आते दलित वोट बैंक को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।

संबंधित खबरें