
यूपी में 80% गुमशुदा मिले, हाईकोर्ट में सरकार का दावा, अगली सुनवाई तय (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
UP Missing Persons: उत्तर प्रदेश में गुमशुदा लोगों की तलाश को लेकर सरकार ने एक अहम दावा किया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चल रही सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश आंकड़ों में बताया गया कि प्रदेश में लापता हुए लगभग 80 प्रतिशत लोगों का पता लगा लिया गया है। यह आंकड़े 1 जनवरी 2024 से 17 मार्च 2026 के बीच के हैं, जिन्हें कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
सरकार द्वारा दाखिल रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में कुल 1,19,070 लोगों के लापता होने की शिकायतें दर्ज की गई थीं। इनमें से 95,061 लोगों को खोज निकाले जाने का दावा किया गया है, जो कुल मामलों का लगभग 79.84 प्रतिशत है। इस आंकड़े को सरकार ने अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया है, वहीं अदालत ने भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी लगातार निगरानी जारी रखी हुई है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए पुलिस और अन्य एजेंसियों द्वारा विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक, डाटा एनालिसिस और विभिन्न राज्यों के साथ समन्वय के जरिए लापता व्यक्तियों को खोजने की कोशिशें तेज की गई हैं। इसके अलावा, महिलाओं और बच्चों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि गुमशुदगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है। न्यायालय ने पुलिस को निर्देशित किया है कि हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और शुरुआती 24 से 48 घंटों के भीतर सक्रिय खोजबीन शुरू की जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
गौरतलब है कि गुमशुदगी के मामलों में कई बार मानव तस्करी, घरेलू विवाद, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं या अन्य सामाजिक कारण भी जुड़े होते हैं। ऐसे में इन मामलों की जांच केवल औपचारिकता न होकर संवेदनशीलता और सतर्कता के साथ की जानी आवश्यक है। अदालत ने इस दिशा में भी सरकार को प्रभावी कदम उठाने की सलाह दी है।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों की जानकारी को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा रहा है, जिससे आम लोग भी जानकारी साझा कर सकें और खोज अभियान में सहयोग दे सकें। इसके अलावा, विभिन्न जिलों में विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो केवल गुमशुदगी के मामलों पर काम कर रही हैं।
हालांकि, अदालत ने इस आंकड़े पर संतोष जताने के साथ-साथ यह भी पूछा कि शेष लगभग 20 प्रतिशत मामलों में अब तक क्या प्रगति हुई है। न्यायालय ने सरकार से कहा कि इन मामलों में भी तेजी लाई जाए और अगली सुनवाई तक विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिन मामलों में लंबे समय से कोई सुराग नहीं मिला है, उन्हें विशेष श्रेणी में रखकर उनकी पुनः जांच की जाए।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कई मामलों में गुमशुदा व्यक्ति स्वयं ही वापस लौट आते हैं, जबकि कुछ मामलों में पुलिस की सक्रियता से उनका पता लगाया जाता है। फिर भी, बड़ी संख्या में ऐसे मामले होते हैं, जिनमें लंबे समय तक कोई जानकारी नहीं मिल पाती, जो प्रशासन के लिए चुनौती बने रहते हैं।
अदालत की खंडपीठ इस पूरे मामले की लगातार निगरानी कर रही है और समय-समय पर सरकार से रिपोर्ट तलब कर रही है। अगली सुनवाई 15 अप्रैल को निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार को अद्यतन आंकड़े और प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी। माना जा रहा है कि कोर्ट इस मामले में और सख्त रुख अपना सकता है, ताकि शेष मामलों में भी तेजी से कार्रवाई हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि गुमशुदगी के मामलों में केवल पुलिस कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। परिवार, स्थानीय समुदाय और सामाजिक संगठनों को भी सतर्क रहना होगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को देनी चाहिए।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़े एक ओर जहां राहत देने वाले हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी संकेत देते हैं कि अभी काफी काम बाकी है। अदालत की निगरानी और सख्ती के चलते उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में गुमशुदा लोगों की तलाश में और तेजी आएगी तथा अधिक से अधिक लोगों को उनके परिवारों से मिलाया जा सकेगा।
Updated on:
26 Mar 2026 11:34 am
Published on:
26 Mar 2026 11:34 am
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